search
Q: In drip irrigation method, the drip nozzles are fixed on laterals, dis-charging water at a very small rate of the order of ड्रिप सिंचाई विधि में, ड्रिप-नोजल को पाश्र्वों पर लगाया जाता है, जिससे बहुत कम दर पर पानी का निर्वहन होता है-
  • A. 0.1 to 1 litre per hour/0.1 से 1 लीटर प्रति घण्टा
  • B. 1 to 2 litres per hour/1 से 2 लीटर प्रति घण्टा
  • C. 2 to 10 litres per hour/2 से 10 लीटर प्रति घण्टा
  • D. 10 to 15 litres per hour/10 से 15 लीटर प्रति घण्टा
Correct Answer: Option C - टपकन सिंचाई (Trickle Irrigation)- ∎ इसे ड्रिप सिंचाई या माइक्रो सिंचाई या स्थानीय सिंचाई भी कहते हैंं। तथा यह अध: स्तल सिंचाई के अंतर्गत आती है। ∎ यह उन जगहों पर अपनायी जाती है, जहाँ सिंचाई के पानी की कमी तथा लवण की समस्या हो। ∎ इस पद्धति में पानी को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिससे वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाली हानि कम हो जाती है। ∎ जड़ क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिए छिद्रित पाइपों में पानी लगभग 2.5 गुना वायुमंडलीय दाब पर पानी भेजते है। ∎ इसकी दक्षता सबसे अधिक होती है। परन्तु यह एक महंगी विधि है जिसमें विशेष ज्ञान व परीक्षण की आवश्यकता होती है। ∎ इसी विधि का उपयोग छोटी नर्सरी बाग-बगीचों व सब्जियों की सिंचाई के लिए करते हैं। ∎ ड्रिप सिंचाई में फीडिंग बोतल तकनीक का प्रयोग किया जाता है। ∎ ड्रिप नोजल, जिन्हें मीटर या वाल्व भी कहा जाता है, नियमित रूप से पाश्र्व पर लगभग 0.5 से 1 मीटर के अन्तराल पर लगे होते है, जिनका निर्वहन २ से 10 लीटर प्रति घण्टा होता है।
C. टपकन सिंचाई (Trickle Irrigation)- ∎ इसे ड्रिप सिंचाई या माइक्रो सिंचाई या स्थानीय सिंचाई भी कहते हैंं। तथा यह अध: स्तल सिंचाई के अंतर्गत आती है। ∎ यह उन जगहों पर अपनायी जाती है, जहाँ सिंचाई के पानी की कमी तथा लवण की समस्या हो। ∎ इस पद्धति में पानी को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिससे वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाली हानि कम हो जाती है। ∎ जड़ क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिए छिद्रित पाइपों में पानी लगभग 2.5 गुना वायुमंडलीय दाब पर पानी भेजते है। ∎ इसकी दक्षता सबसे अधिक होती है। परन्तु यह एक महंगी विधि है जिसमें विशेष ज्ञान व परीक्षण की आवश्यकता होती है। ∎ इसी विधि का उपयोग छोटी नर्सरी बाग-बगीचों व सब्जियों की सिंचाई के लिए करते हैं। ∎ ड्रिप सिंचाई में फीडिंग बोतल तकनीक का प्रयोग किया जाता है। ∎ ड्रिप नोजल, जिन्हें मीटर या वाल्व भी कहा जाता है, नियमित रूप से पाश्र्व पर लगभग 0.5 से 1 मीटर के अन्तराल पर लगे होते है, जिनका निर्वहन २ से 10 लीटर प्रति घण्टा होता है।

Explanations:

टपकन सिंचाई (Trickle Irrigation)- ∎ इसे ड्रिप सिंचाई या माइक्रो सिंचाई या स्थानीय सिंचाई भी कहते हैंं। तथा यह अध: स्तल सिंचाई के अंतर्गत आती है। ∎ यह उन जगहों पर अपनायी जाती है, जहाँ सिंचाई के पानी की कमी तथा लवण की समस्या हो। ∎ इस पद्धति में पानी को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिससे वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाली हानि कम हो जाती है। ∎ जड़ क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिए छिद्रित पाइपों में पानी लगभग 2.5 गुना वायुमंडलीय दाब पर पानी भेजते है। ∎ इसकी दक्षता सबसे अधिक होती है। परन्तु यह एक महंगी विधि है जिसमें विशेष ज्ञान व परीक्षण की आवश्यकता होती है। ∎ इसी विधि का उपयोग छोटी नर्सरी बाग-बगीचों व सब्जियों की सिंचाई के लिए करते हैं। ∎ ड्रिप सिंचाई में फीडिंग बोतल तकनीक का प्रयोग किया जाता है। ∎ ड्रिप नोजल, जिन्हें मीटर या वाल्व भी कहा जाता है, नियमित रूप से पाश्र्व पर लगभग 0.5 से 1 मीटर के अन्तराल पर लगे होते है, जिनका निर्वहन २ से 10 लीटर प्रति घण्टा होता है।