Correct Answer:
Option C - टपकन सिंचाई (Trickle Irrigation)-
∎ इसे ड्रिप सिंचाई या माइक्रो सिंचाई या स्थानीय सिंचाई भी कहते हैंं। तथा यह अध: स्तल सिंचाई के अंतर्गत आती है।
∎ यह उन जगहों पर अपनायी जाती है, जहाँ सिंचाई के पानी की कमी तथा लवण की समस्या हो।
∎ इस पद्धति में पानी को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिससे वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाली हानि कम हो जाती है।
∎ जड़ क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिए छिद्रित पाइपों में पानी लगभग 2.5 गुना वायुमंडलीय दाब पर पानी भेजते है।
∎ इसकी दक्षता सबसे अधिक होती है। परन्तु यह एक महंगी विधि है जिसमें विशेष ज्ञान व परीक्षण की आवश्यकता होती है।
∎ इसी विधि का उपयोग छोटी नर्सरी बाग-बगीचों व सब्जियों की सिंचाई के लिए करते हैं।
∎ ड्रिप सिंचाई में फीडिंग बोतल तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
∎ ड्रिप नोजल, जिन्हें मीटर या वाल्व भी कहा जाता है, नियमित रूप से पाश्र्व पर लगभग 0.5 से 1 मीटर के अन्तराल पर लगे होते है, जिनका निर्वहन २ से 10 लीटर प्रति घण्टा होता है।
C. टपकन सिंचाई (Trickle Irrigation)-
∎ इसे ड्रिप सिंचाई या माइक्रो सिंचाई या स्थानीय सिंचाई भी कहते हैंं। तथा यह अध: स्तल सिंचाई के अंतर्गत आती है।
∎ यह उन जगहों पर अपनायी जाती है, जहाँ सिंचाई के पानी की कमी तथा लवण की समस्या हो।
∎ इस पद्धति में पानी को सीधे पौधों के जड़ क्षेत्र में पहुँचाया जाता है जिससे वाष्पीकरण और रिसाव से होने वाली हानि कम हो जाती है।
∎ जड़ क्षेत्र में पानी पहुँचाने के लिए छिद्रित पाइपों में पानी लगभग 2.5 गुना वायुमंडलीय दाब पर पानी भेजते है।
∎ इसकी दक्षता सबसे अधिक होती है। परन्तु यह एक महंगी विधि है जिसमें विशेष ज्ञान व परीक्षण की आवश्यकता होती है।
∎ इसी विधि का उपयोग छोटी नर्सरी बाग-बगीचों व सब्जियों की सिंचाई के लिए करते हैं।
∎ ड्रिप सिंचाई में फीडिंग बोतल तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
∎ ड्रिप नोजल, जिन्हें मीटर या वाल्व भी कहा जाता है, नियमित रूप से पाश्र्व पर लगभग 0.5 से 1 मीटर के अन्तराल पर लगे होते है, जिनका निर्वहन २ से 10 लीटर प्रति घण्टा होता है।