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Q: .
  • A. जैनेन्द्र
  • B. अज्ञेय
  • C. देवराज
  • D. इलाचंद्र जोशी
Correct Answer: Option D - ‘‘छायावादी कवियों की कल्पना-लोक की उड़ान अपनी अक्षमता की पूर्ति का प्रयास है।’’ यह कथन इलाचन्द्र जोशी का है। हिन्दी आलोचना में इलाचन्द्र जोशी को मनोविश्लेषणवादी आलोचना का जनक माना जाता है। साहित्य सर्जना (1940 ई.), विवेचना (1948 ई.), विश्लेषण (1954 ई.), देखा परखा (1957 ई.), इलाचन्द्र जोशी द्वारा रचित प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं।
D. ‘‘छायावादी कवियों की कल्पना-लोक की उड़ान अपनी अक्षमता की पूर्ति का प्रयास है।’’ यह कथन इलाचन्द्र जोशी का है। हिन्दी आलोचना में इलाचन्द्र जोशी को मनोविश्लेषणवादी आलोचना का जनक माना जाता है। साहित्य सर्जना (1940 ई.), विवेचना (1948 ई.), विश्लेषण (1954 ई.), देखा परखा (1957 ई.), इलाचन्द्र जोशी द्वारा रचित प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं।

Explanations:

‘‘छायावादी कवियों की कल्पना-लोक की उड़ान अपनी अक्षमता की पूर्ति का प्रयास है।’’ यह कथन इलाचन्द्र जोशी का है। हिन्दी आलोचना में इलाचन्द्र जोशी को मनोविश्लेषणवादी आलोचना का जनक माना जाता है। साहित्य सर्जना (1940 ई.), विवेचना (1948 ई.), विश्लेषण (1954 ई.), देखा परखा (1957 ई.), इलाचन्द्र जोशी द्वारा रचित प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं।