Correct Answer:
Option B - अपरूपण बल तथा बंकन आघूर्ण डायग्राम में, यदि धरन के किसी बिन्दु पर बलयुग्म लगता है, तो वहाँ पर बंकन आघूर्ण में एकाएक परिवर्तन होता है।
यदि धरन के किसी भाग में कोई बल नहीं लगता है तो उस भाग में कर्तन बल स्थिर रहता है और नमन आघूर्ण सरल रेखीय ढंग से बदलता है।
यदि धरन के किसी भाग में समवितरित भार लगता है, तो धरन के उस भाग में कर्तन बल सरल रेखीय ढंग से बदलता है तथा नमन आघूर्ण परवलयिक ढंग से बदलता है।
जिस स्थान पर संकेन्द्रित भार लगा हो, उस स्थान पर कर्तन बल एकदम बदलता है।
जिस स्थान पर नमन आघूर्ण आरेख अपना चिन्ह बदलता है अर्थात् + से – या – से + में तो उस बिन्दु को नति परिवर्तन बिन्दु कहते हैं।
B. अपरूपण बल तथा बंकन आघूर्ण डायग्राम में, यदि धरन के किसी बिन्दु पर बलयुग्म लगता है, तो वहाँ पर बंकन आघूर्ण में एकाएक परिवर्तन होता है।
यदि धरन के किसी भाग में कोई बल नहीं लगता है तो उस भाग में कर्तन बल स्थिर रहता है और नमन आघूर्ण सरल रेखीय ढंग से बदलता है।
यदि धरन के किसी भाग में समवितरित भार लगता है, तो धरन के उस भाग में कर्तन बल सरल रेखीय ढंग से बदलता है तथा नमन आघूर्ण परवलयिक ढंग से बदलता है।
जिस स्थान पर संकेन्द्रित भार लगा हो, उस स्थान पर कर्तन बल एकदम बदलता है।
जिस स्थान पर नमन आघूर्ण आरेख अपना चिन्ह बदलता है अर्थात् + से – या – से + में तो उस बिन्दु को नति परिवर्तन बिन्दु कहते हैं।