Correct Answer:
Option A - स्पर या ठोकरे–भुजारोध (ग्रॉयन) एक कम लम्बाई का लघु बन्ध होता है जो नदी के विचलित प्रवाह से नदी के तटों की रक्षा करने के लिये तथा नदी के पाट को साधने के लिये, इसके प्रवाह के समकोणक पर बनाया जाता है। ग्रायन नदी के तट बन्ध से शुरू होकर नदी के भीतर इसकी मुख्य धारा तक बनाया जाता है। अस्थाई ग्रॉयन को स्पर कहते हैं।
A. स्पर या ठोकरे–भुजारोध (ग्रॉयन) एक कम लम्बाई का लघु बन्ध होता है जो नदी के विचलित प्रवाह से नदी के तटों की रक्षा करने के लिये तथा नदी के पाट को साधने के लिये, इसके प्रवाह के समकोणक पर बनाया जाता है। ग्रायन नदी के तट बन्ध से शुरू होकर नदी के भीतर इसकी मुख्य धारा तक बनाया जाता है। अस्थाई ग्रॉयन को स्पर कहते हैं।