Explanations:
जब बच्चे अपने शिक्षक के साथ बातचीत करते है तो वे अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने में सक्षम हो जाते है। बच्चा सबसे पहले अपनी माँ के संपर्क में आकर अपनी भावनाओं को शारीरिक गतिविधियों से अभिव्यक्ति करता है इसके बाद वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क में आता है। बच्चों का भावात्मक पक्ष काफी नाजुक व संवेदनशील होता है। वह हर किसी से अपनी भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त नहीं कर पाते। इसलिए शिक्षक को इस प्रकार प्रशिक्षित होना चाहिए जिससे छात्र अपनी भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त कर सकें । ऐसा करने से बच्चों के जीवन का अन्य पहलु को मार्गदर्शित करने में अध्यापक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।