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Q: ‘‘हितान्न य: संशृणते स किं प्रभु: इसमें ‘‘हितात्’’ पद में किस सूत्र से पञ्चमी विभक्ति है?
  • A. भीत्रार्थानां भयहेतु
  • B. अपादाने पञ्चमी
  • C. आख्यातोपयोगे
  • D. वारणार्थानामीप्सित:
Correct Answer: Option B - ‘‘हितान्न य: संशृणते स किं प्रभु: इसमें ‘‘हितात्’’ पद में अपादाने पंचमी सूत्र से पंचमी विभक्ति हुई है। जबकि आयोग ने विकल्प (c) सही माना है। भीत्रार्थानां भयहेतु: - भयार्थक और त्राणार्थक धातुओं में आख्यातोपयोग - नियमपूर्वक विद्या ग्रहण करने में वारणार्थानामीप्सित: - वारण (हटाना) करने के अर्थ में
B. ‘‘हितान्न य: संशृणते स किं प्रभु: इसमें ‘‘हितात्’’ पद में अपादाने पंचमी सूत्र से पंचमी विभक्ति हुई है। जबकि आयोग ने विकल्प (c) सही माना है। भीत्रार्थानां भयहेतु: - भयार्थक और त्राणार्थक धातुओं में आख्यातोपयोग - नियमपूर्वक विद्या ग्रहण करने में वारणार्थानामीप्सित: - वारण (हटाना) करने के अर्थ में

Explanations:

‘‘हितान्न य: संशृणते स किं प्रभु: इसमें ‘‘हितात्’’ पद में अपादाने पंचमी सूत्र से पंचमी विभक्ति हुई है। जबकि आयोग ने विकल्प (c) सही माना है। भीत्रार्थानां भयहेतु: - भयार्थक और त्राणार्थक धातुओं में आख्यातोपयोग - नियमपूर्वक विद्या ग्रहण करने में वारणार्थानामीप्सित: - वारण (हटाना) करने के अर्थ में