Correct Answer:
Option B - ‘‘हितान्न य: संशृणते स किं प्रभु: इसमें ‘‘हितात्’’ पद में अपादाने पंचमी सूत्र से पंचमी विभक्ति हुई है। जबकि आयोग ने विकल्प (c) सही माना है।
भीत्रार्थानां भयहेतु: - भयार्थक और त्राणार्थक धातुओं में
आख्यातोपयोग - नियमपूर्वक विद्या ग्रहण करने में
वारणार्थानामीप्सित: - वारण (हटाना) करने के अर्थ में
B. ‘‘हितान्न य: संशृणते स किं प्रभु: इसमें ‘‘हितात्’’ पद में अपादाने पंचमी सूत्र से पंचमी विभक्ति हुई है। जबकि आयोग ने विकल्प (c) सही माना है।
भीत्रार्थानां भयहेतु: - भयार्थक और त्राणार्थक धातुओं में
आख्यातोपयोग - नियमपूर्वक विद्या ग्रहण करने में
वारणार्थानामीप्सित: - वारण (हटाना) करने के अर्थ में