Correct Answer:
Option B - ‘‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।’’ इति भारविना उक्तम्। किरातार्जुनीयम् महाकाव्य महाकवि भारवि की प्रसिद्ध रचना है यह 18 सर्गों में विभक्त है तथा इसी महाकाव्य के प्रथम सर्ग में युधिष्ठिर-वनेचर वार्तालाप में वनेचर द्वारा कहा गया है। वनेचर महाराज युधिष्ठिर से कहता है कि हे महाराज! ‘‘हितकर और मनोहर वाणी दुर्लभ है।’’
B. ‘‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:।’’ इति भारविना उक्तम्। किरातार्जुनीयम् महाकाव्य महाकवि भारवि की प्रसिद्ध रचना है यह 18 सर्गों में विभक्त है तथा इसी महाकाव्य के प्रथम सर्ग में युधिष्ठिर-वनेचर वार्तालाप में वनेचर द्वारा कहा गया है। वनेचर महाराज युधिष्ठिर से कहता है कि हे महाराज! ‘‘हितकर और मनोहर वाणी दुर्लभ है।’’