Correct Answer:
Option B - ‘हँसना’ एक अकर्मक क्रिया है। जिस क्रिया का फल, कर्म पर न पड़कर कर्ता पर पड़ता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। इसमें किसी कर्म की आवश्यकता नहीं होती। जैसे-सोना, उड़ना, भागना, नाचना आदि।
B. ‘हँसना’ एक अकर्मक क्रिया है। जिस क्रिया का फल, कर्म पर न पड़कर कर्ता पर पड़ता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं। इसमें किसी कर्म की आवश्यकता नहीं होती। जैसे-सोना, उड़ना, भागना, नाचना आदि।