Correct Answer:
Option A - ‘‘हरत्यघं सम्प्रति हेतुरेष्यत:’’ यह पद्यांश शिशुपालवध का है। शिशुपालवधम् महाकवि माघ की एकमात्र रचना है। हरत्यघं सम्प्रति हेतुरेष्यत:, शुभस्य पूर्वाचरितै: कृतं शुभै:। शरीर भाजां, भवदीय दर्शनं, व्यनक्ति कालत्रितयेऽपि योग्यताम्। अर्थात्- आपका दर्शन शरीर धारियों की तीनों काल में भी पवित्रता प्रकट करता है, वर्तमान काल में पाप को विनष्ट करता है, आने वाले मंगल का कारण बनता है और (वह स्वयं) पहले के किए पुण्यों से प्राप्त होता है।
A. ‘‘हरत्यघं सम्प्रति हेतुरेष्यत:’’ यह पद्यांश शिशुपालवध का है। शिशुपालवधम् महाकवि माघ की एकमात्र रचना है। हरत्यघं सम्प्रति हेतुरेष्यत:, शुभस्य पूर्वाचरितै: कृतं शुभै:। शरीर भाजां, भवदीय दर्शनं, व्यनक्ति कालत्रितयेऽपि योग्यताम्। अर्थात्- आपका दर्शन शरीर धारियों की तीनों काल में भी पवित्रता प्रकट करता है, वर्तमान काल में पाप को विनष्ट करता है, आने वाले मंगल का कारण बनता है और (वह स्वयं) पहले के किए पुण्यों से प्राप्त होता है।