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Q: हरेला पर्व-2015 के दौरान उत्तराखण्ड द्वारा शुरू किये गये सरंक्षण-कार्यक्रम का नाम है–
  • A. हमारा पौधा, हमारा पैसा
  • B. हरियाली
  • C. पेड़ बचाओं
  • D. हमारा पेड़, हमारा धन
Correct Answer: Option D - हमारा पेड़, हमारा धन– उत्तराखण्ड सरकार द्वारा इस योजना से लगभग 46 हजार पेड़ों का भविष्य सुरक्षित हो गया। इस योजना के तहत यह पेड़ हर साल लगभग 10 लाख किलोग्राम कार्बन भी सोखेगें। चिपको और मैत्री आन्दोलन उत्तराखण्ड में पेड़ों के बचाव से संबंधित है। चिपको आन्दोलन– यह आन्दोलन वर्ष 1973 में उत्तराखण्ड (तब उत्तर प्रदेश) के चमोली जिले में शुरू हुआ। इसका नेतृत्व सुन्दरलाल बहुगुणा ने किया था। इस आन्दोलन की शुरूआत चंडी प्रसाद भट्ट और गौरा देवी की ओर से की गयी थी। सुन्दर लाल बहुगुणा ने लोगों को पेड़ों के महत्व के बारे में जागरूक किया, जिसके बाद लोगों ने पेड़ों को बचाने का प्रण लिया।
D. हमारा पेड़, हमारा धन– उत्तराखण्ड सरकार द्वारा इस योजना से लगभग 46 हजार पेड़ों का भविष्य सुरक्षित हो गया। इस योजना के तहत यह पेड़ हर साल लगभग 10 लाख किलोग्राम कार्बन भी सोखेगें। चिपको और मैत्री आन्दोलन उत्तराखण्ड में पेड़ों के बचाव से संबंधित है। चिपको आन्दोलन– यह आन्दोलन वर्ष 1973 में उत्तराखण्ड (तब उत्तर प्रदेश) के चमोली जिले में शुरू हुआ। इसका नेतृत्व सुन्दरलाल बहुगुणा ने किया था। इस आन्दोलन की शुरूआत चंडी प्रसाद भट्ट और गौरा देवी की ओर से की गयी थी। सुन्दर लाल बहुगुणा ने लोगों को पेड़ों के महत्व के बारे में जागरूक किया, जिसके बाद लोगों ने पेड़ों को बचाने का प्रण लिया।

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हमारा पेड़, हमारा धन– उत्तराखण्ड सरकार द्वारा इस योजना से लगभग 46 हजार पेड़ों का भविष्य सुरक्षित हो गया। इस योजना के तहत यह पेड़ हर साल लगभग 10 लाख किलोग्राम कार्बन भी सोखेगें। चिपको और मैत्री आन्दोलन उत्तराखण्ड में पेड़ों के बचाव से संबंधित है। चिपको आन्दोलन– यह आन्दोलन वर्ष 1973 में उत्तराखण्ड (तब उत्तर प्रदेश) के चमोली जिले में शुरू हुआ। इसका नेतृत्व सुन्दरलाल बहुगुणा ने किया था। इस आन्दोलन की शुरूआत चंडी प्रसाद भट्ट और गौरा देवी की ओर से की गयी थी। सुन्दर लाल बहुगुणा ने लोगों को पेड़ों के महत्व के बारे में जागरूक किया, जिसके बाद लोगों ने पेड़ों को बचाने का प्रण लिया।