Correct Answer:
Option A - ‘हिन्दुविश्वविद्यालयं संस्थापितवान्’ इत्यत्र ‘संस्थापितवान्’ इत्यस्य पदस्य व्युत्पत्ति: - सम् + स्था + पुक् + क्तवतु ।
‘हिन्दुविश्वविद्यालयं संस्थापितवान् ’ यहाँ ‘संस्थापितवान् ’ पद की व्युत्पत्ति है – सम् + स्था + पुक् + क्तवतु ।
क्त और क्तवतु इन दोनों प्रत्ययों को ‘निष्ठा’ कहते हैं। निष्ठा शब्द का यौगिक अर्थ है - ‘समाप्ति’। क्तवतु का ‘तवत्’ शेष रह जाता है। इसका रूप तीनों लिङ्गों में और सातों विभक्तियों में विशेष्य के अनुसार होते हैं।
क्तवतु प्रत्यय से अन्त होने वाले शब्द सदा कर्तृवाच्य में प्रयोग में आते हैं ; अर्थात् कर्ता के विशेषण होते हैं। स: भुक्तवान् ।
A. ‘हिन्दुविश्वविद्यालयं संस्थापितवान्’ इत्यत्र ‘संस्थापितवान्’ इत्यस्य पदस्य व्युत्पत्ति: - सम् + स्था + पुक् + क्तवतु ।
‘हिन्दुविश्वविद्यालयं संस्थापितवान् ’ यहाँ ‘संस्थापितवान् ’ पद की व्युत्पत्ति है – सम् + स्था + पुक् + क्तवतु ।
क्त और क्तवतु इन दोनों प्रत्ययों को ‘निष्ठा’ कहते हैं। निष्ठा शब्द का यौगिक अर्थ है - ‘समाप्ति’। क्तवतु का ‘तवत्’ शेष रह जाता है। इसका रूप तीनों लिङ्गों में और सातों विभक्तियों में विशेष्य के अनुसार होते हैं।
क्तवतु प्रत्यय से अन्त होने वाले शब्द सदा कर्तृवाच्य में प्रयोग में आते हैं ; अर्थात् कर्ता के विशेषण होते हैं। स: भुक्तवान् ।