Correct Answer:
Option D - हिमानी मृदा (Glacial soil)– ग्लेशियरों के पिघलने पर ये कण पानी के साथ बहकर नीचे आ जाते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में किसी उपयुक्त स्थान पर जमकर मृदा का निर्माण करते हैं इस प्रकार निर्मित मृदा हिमानी मृदा (Glacial soil) कहलाती है।
उदाहरण-टिल तथा ड्रिफ्ट।
सरोवरी मृदा (Lacustrine soil)– झीलों (lake) की तली में जमी मृदा को सरोवरीय मृदा (Lacustrine soil) कहते हैं।
जलोढ़ मृदा (Alluvial soil)– पानी द्वारा जो मृदा प्रवाहित होती है वह अपने परिवहन के दौरान ही (जब पानी का वेग घट जाता है) जमना (Deposit) शुरु हो जाती है। इसे जलोढ़ मृदा (Alluvial soil) कहते हैं।
एओलिन मृदा (Aeolian soil)– वायु द्वारा परिवहित व जमी मृदायें एओलिन (Aeolian) मृदा कहलाती है।
D. हिमानी मृदा (Glacial soil)– ग्लेशियरों के पिघलने पर ये कण पानी के साथ बहकर नीचे आ जाते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में किसी उपयुक्त स्थान पर जमकर मृदा का निर्माण करते हैं इस प्रकार निर्मित मृदा हिमानी मृदा (Glacial soil) कहलाती है।
उदाहरण-टिल तथा ड्रिफ्ट।
सरोवरी मृदा (Lacustrine soil)– झीलों (lake) की तली में जमी मृदा को सरोवरीय मृदा (Lacustrine soil) कहते हैं।
जलोढ़ मृदा (Alluvial soil)– पानी द्वारा जो मृदा प्रवाहित होती है वह अपने परिवहन के दौरान ही (जब पानी का वेग घट जाता है) जमना (Deposit) शुरु हो जाती है। इसे जलोढ़ मृदा (Alluvial soil) कहते हैं।
एओलिन मृदा (Aeolian soil)– वायु द्वारा परिवहित व जमी मृदायें एओलिन (Aeolian) मृदा कहलाती है।