Correct Answer:
Option A - प्रजातियों के विलोपन एवं नई प्रजातियों का उद्भवन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, परंतु यह अत्यंत धीमी प्रक्रिया है। किन्तु मानव के व्यावसायिक हित ने प्रजातियों एवं वन्य जीवन तथा जैव विविधता का ह्रास अत्यंत तीव्र कर दिया है। यह इतनी तीव्र है कि नयी प्रजातियों के उद्भवन के लिए वांछित समय नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि वर्तमान समय में किए जा रहे तमाम वैश्विक प्रयासों के बावजूद भी हमारे वन्य जीवन संसाधन में बड़ी तेजी से कमी आ रही है। प्राकृतिक आवासों का विनाश, अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन, औद्योगीकरण आदि, वन्य जीवन के ह्रास के प्रमुख कारण हैं।
A. प्रजातियों के विलोपन एवं नई प्रजातियों का उद्भवन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, परंतु यह अत्यंत धीमी प्रक्रिया है। किन्तु मानव के व्यावसायिक हित ने प्रजातियों एवं वन्य जीवन तथा जैव विविधता का ह्रास अत्यंत तीव्र कर दिया है। यह इतनी तीव्र है कि नयी प्रजातियों के उद्भवन के लिए वांछित समय नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि वर्तमान समय में किए जा रहे तमाम वैश्विक प्रयासों के बावजूद भी हमारे वन्य जीवन संसाधन में बड़ी तेजी से कमी आ रही है। प्राकृतिक आवासों का विनाश, अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन, औद्योगीकरण आदि, वन्य जीवन के ह्रास के प्रमुख कारण हैं।