Correct Answer:
Option A - गायत्रीमन्त्रस्य उपास्य देवता ‘सविता’ वर्तते। अर्थात् गायत्रीमन्त्र के उपास्य देवता ‘सविता’ हैं। इस मन्त्र में सवितृ देव की उपासना है, इसलिए इसे सावित्री मन्त्र भी कहा जाता है।
गायत्री मन्त्र
ॐ भूर्भुव: स्व:। तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।
इसमें 24 मात्राएँ होती हैं इसके उपास्य देव सविता हैं।
A. गायत्रीमन्त्रस्य उपास्य देवता ‘सविता’ वर्तते। अर्थात् गायत्रीमन्त्र के उपास्य देवता ‘सविता’ हैं। इस मन्त्र में सवितृ देव की उपासना है, इसलिए इसे सावित्री मन्त्र भी कहा जाता है।
गायत्री मन्त्र
ॐ भूर्भुव: स्व:। तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।
इसमें 24 मात्राएँ होती हैं इसके उपास्य देव सविता हैं।