Correct Answer:
Option A - 18वीं शताब्दी के चित्रकार, कवि और इतिहासकार मौलाराम ने ‘गढ़वाल राजवंश का इतिहास’ लिखा है। गढ़वाल के शासकोें के बारे में यही एकमात्र स्रोत है। प्रतिहार साम्राज्य के पतन के पश्चात कन्नौज तथा बनारस में जिस राजवंश का शासन स्थापित हुआ उसे गढ़वाल वंश कहा जाता है।
रतनकवि ने ‘फतेहभूषण’ नामक एक अलंकार ग्रंथ की रचना की थी। यह श्रीनगर, गढ़वाल के राजा फतहसिंह के यहाँ रहते थे।
गुमानीपंत – काशीपुर राज्य के राजकवि थे। वे संस्कृत और हिन्दी के कवि थे। कुछ लोग इन्हें खड़ी बोली का प्रथम कवि मानते है। इनके द्वारा रचित कृतियाँ– रामनामपंचपंचाशिला, राम महिमा, गंगा शतक आदि। इनके द्वारा रचित कुछ कविताएँ– दुर्जनदूषण, समस्यापूर्ति आदि।
A. 18वीं शताब्दी के चित्रकार, कवि और इतिहासकार मौलाराम ने ‘गढ़वाल राजवंश का इतिहास’ लिखा है। गढ़वाल के शासकोें के बारे में यही एकमात्र स्रोत है। प्रतिहार साम्राज्य के पतन के पश्चात कन्नौज तथा बनारस में जिस राजवंश का शासन स्थापित हुआ उसे गढ़वाल वंश कहा जाता है।
रतनकवि ने ‘फतेहभूषण’ नामक एक अलंकार ग्रंथ की रचना की थी। यह श्रीनगर, गढ़वाल के राजा फतहसिंह के यहाँ रहते थे।
गुमानीपंत – काशीपुर राज्य के राजकवि थे। वे संस्कृत और हिन्दी के कवि थे। कुछ लोग इन्हें खड़ी बोली का प्रथम कवि मानते है। इनके द्वारा रचित कृतियाँ– रामनामपंचपंचाशिला, राम महिमा, गंगा शतक आदि। इनके द्वारा रचित कुछ कविताएँ– दुर्जनदूषण, समस्यापूर्ति आदि।