Correct Answer:
Option C - गार्सा द तासी का इतिहास ग्रंथ ‘इस्त्वार द ला लितरेत्यूर ऐन्दुई ऐन्दुस्तानी’ का दूसरा संस्करण 1871 ई० में प्रकाशित हुआ था। इसका पहला संस्करण दो भागों में सन् 1839 ई. तथा 1847 ई. में प्रकाशित हुआ। इस ग्रंथ में कुल 738 कवि हैं, जिनमें हिन्दी के 72 तथा शेष उर्दू के हैं।
हिन्दी साहित्य के इतिहास - लेखन का सबसे पहला प्रयास फ्रेंच विद्वान ‘गार्सा द तासी’ ने किया था।
• गार्सा द तासी ने अपनी पुस्तक की रचना ‘फ्रेंच भाषा’ में की।
• डॉ. लक्ष्मीसागर वाष्णेय ने तासी के ग्रन्थ का हिन्दी अनुवाद ‘हिन्दुई साहित्य का इतिहास’ (1952ई०) नाम से प्रकाशित कराया।
C. गार्सा द तासी का इतिहास ग्रंथ ‘इस्त्वार द ला लितरेत्यूर ऐन्दुई ऐन्दुस्तानी’ का दूसरा संस्करण 1871 ई० में प्रकाशित हुआ था। इसका पहला संस्करण दो भागों में सन् 1839 ई. तथा 1847 ई. में प्रकाशित हुआ। इस ग्रंथ में कुल 738 कवि हैं, जिनमें हिन्दी के 72 तथा शेष उर्दू के हैं।
हिन्दी साहित्य के इतिहास - लेखन का सबसे पहला प्रयास फ्रेंच विद्वान ‘गार्सा द तासी’ ने किया था।
• गार्सा द तासी ने अपनी पुस्तक की रचना ‘फ्रेंच भाषा’ में की।
• डॉ. लक्ष्मीसागर वाष्णेय ने तासी के ग्रन्थ का हिन्दी अनुवाद ‘हिन्दुई साहित्य का इतिहास’ (1952ई०) नाम से प्रकाशित कराया।