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Q: गुलाम वंश के शासक गयासुद्दीन बलबन (1265-1286 ई.) ने ……. ...........की उपाधि धारण की।
  • A. नूर-अल-दीन (विश्वास का प्रकाश)
  • B. नूरमहल (महल की रोशनी)
  • C. जिल-ए-इलाही (भगवान की छाया)
  • D. जहाँपनाह (विश्व के रक्षक)
Correct Answer: Option C - गुलाम वंश के शासक गयासुद्दीन बलवन (1265-1286 ई०) ने `जिल-ए-इलाही' (भगवान की छाया) की उपाधि धारण की। उसका मूल नाम बहाउद्दीन था। यह एक इल्बरी तुर्क था। इसने तुर्कान-ए-चहलगानी का दमन किया तथा राजत्व के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इसके अनुसार राजा नेमत-ए-खुदायी (ईश्वर का प्रतिनिधि) होता है। • बलवन की हत्या सैनिक द्वारा 1286 में कर दी गयी थी। इसका मकबरा मेहरौली (दिल्ली) में है।
C. गुलाम वंश के शासक गयासुद्दीन बलवन (1265-1286 ई०) ने `जिल-ए-इलाही' (भगवान की छाया) की उपाधि धारण की। उसका मूल नाम बहाउद्दीन था। यह एक इल्बरी तुर्क था। इसने तुर्कान-ए-चहलगानी का दमन किया तथा राजत्व के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इसके अनुसार राजा नेमत-ए-खुदायी (ईश्वर का प्रतिनिधि) होता है। • बलवन की हत्या सैनिक द्वारा 1286 में कर दी गयी थी। इसका मकबरा मेहरौली (दिल्ली) में है।

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गुलाम वंश के शासक गयासुद्दीन बलवन (1265-1286 ई०) ने `जिल-ए-इलाही' (भगवान की छाया) की उपाधि धारण की। उसका मूल नाम बहाउद्दीन था। यह एक इल्बरी तुर्क था। इसने तुर्कान-ए-चहलगानी का दमन किया तथा राजत्व के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इसके अनुसार राजा नेमत-ए-खुदायी (ईश्वर का प्रतिनिधि) होता है। • बलवन की हत्या सैनिक द्वारा 1286 में कर दी गयी थी। इसका मकबरा मेहरौली (दिल्ली) में है।