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Q: ``गच्छ पादयो: प्रणम्य निवर्तयैनं' यह कथन है- के प्रति
  • A. अनसूया का प्रियंवदा के प्रति
  • B. प्रियंवदा का अनसूया के प्रति
  • C. शकुन्तला का अनसूया
  • D. अनसूया का शकुन्तला के प्रति
Correct Answer: Option A - ``गच्छ पादयो: प्रणम्य निवर्तयैनं' यह कथन अभिज्ञानशाकुन्तलम् नाटक के चतुर्थ अङ्क का है। यह कथन अनसूया प्रियंवदा कहती है। जब शकुन्तला के द्वारा ध्यान न दिये जाने पर दुर्वासा ऋषि शकुन्तला को शाप दे देते हैं। इस की जानकारी होने पर अनसूया प्रियंवदा से कहती है कि जाओ ऋषि को प्रणाम को वापस ले आओ।
A. ``गच्छ पादयो: प्रणम्य निवर्तयैनं' यह कथन अभिज्ञानशाकुन्तलम् नाटक के चतुर्थ अङ्क का है। यह कथन अनसूया प्रियंवदा कहती है। जब शकुन्तला के द्वारा ध्यान न दिये जाने पर दुर्वासा ऋषि शकुन्तला को शाप दे देते हैं। इस की जानकारी होने पर अनसूया प्रियंवदा से कहती है कि जाओ ऋषि को प्रणाम को वापस ले आओ।

Explanations:

``गच्छ पादयो: प्रणम्य निवर्तयैनं' यह कथन अभिज्ञानशाकुन्तलम् नाटक के चतुर्थ अङ्क का है। यह कथन अनसूया प्रियंवदा कहती है। जब शकुन्तला के द्वारा ध्यान न दिये जाने पर दुर्वासा ऋषि शकुन्तला को शाप दे देते हैं। इस की जानकारी होने पर अनसूया प्रियंवदा से कहती है कि जाओ ऋषि को प्रणाम को वापस ले आओ।