Explanations:
कनिष्क ने हान राजवंश के राजा हान-हो-ती के साथ युद्ध किया था तथा अपने साम्राज्य का विस्तार मध्य एशिया (उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान, चीन का सिक्यांग एवं कांसू प्रान्त अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान) और समस्त उत्तर भारत तक किया था। कनिष्क के समय में कश्मीर के कुण्डलवन में चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ तथा इसी बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म हीनयान और महायान में विभाजित हो गया। ध्यातव्य है कि कनिष्क के समय में दो नवीन कला शैलियों का जन्म हुआ जिसे गान्धार एवं मथुरा कला शैली कहा जाता है। गान्धार कला शैली का केन्द्र बिन्दु गांधार था इसलिए इसका नाम गांधार कला शैली पड़ा। इसे इण्डोग्रीक शैली या ग्रीक बुद्धिष्ट शैली भी कहा जाता है। मथुरा कला शैली का जन्म कनिष्क के समय मथुरा में हुआ। इस शैली में लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग होता है। बुद्ध की प्रथम मूर्ति इसी कला शैली में निर्मित हुई।