Explanations:
दक्षिणी दोलन का वॉकर परिचालन से घनिष्ठ सम्बन्ध है। दक्षिणी दोलन की तीव्रता की माप ताहिती (मध्य प्रशान्त) एवं डार्विन (उ. ऑस्ट्रेलिया) के बीच वायुदाब के अन्तर से की जाती है। धनात्मक वायुदाब से हिन्द महासागर के क्षेत्र में जाड़े में वायुदाब कम और प्रशान्त महासागरीय क्षेत्र में अधिक रहता है। इससे मानसून सामान्य हो जाता है तथा ऋणात्मक मान के दौरान हिन्द महासागर क्षेत्र में जाड़े में वायुदाब अधिक पाया जाता है इससे मानसून कमजोर हो जाता है। इस दोलन की जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान सेवा के महानिदेशक सर गिल्बर्ट वॉकर द्वारा 1924 ई. में दी गयी।