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द्वितीय बौद्ध परिषद् कहाँ हुई थी?
स्वर्णजयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (एस.जी.एस.वाई.) को लागू किया गया था
What does the basic objective of the Panchayati Raj System ensure?/पंचायती राज व्यवस्था का मूल उद्देश्य क्या सुनिश्चित करता है? (A) Public participation in development /विकास में जन भागीदारी (B) Political accountability /राजनीतिक जवाबदेही (C) Democratic decentralization/लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण (D) Financial collection /वित्तीय संग्रहण नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:/ Select the correct answer by using the codes given below:
नीचे दिए गये गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर चुनें। प्र.सं. (89-93) संस्कृतियों के निर्माण में एक सीमा तक देश और जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्राय: सभी सुसंस्कृत और सभ्य देशों में एक सीमा तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अंतर अवश्य आता है। राष्ट्रीय या जातीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परंपरा से संतृप्त बनाती है, अपनी रीति-नीति की संपदा से विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिलन के अवसर अति सुलभ हो गए हैं। कुछ ऐसे विदेशी प्रभाव हमारे देश पर पड़ रहे हैं, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु बना दिया है। हमारी आस्था डिगने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। राष्ट्रीय या जातीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान क्या है?
Sand T are points which lie on PQ and PR sides of ∠PQR respectively such that PS×PR = PQ× PR. If ∠Q = 96º and ∠PST = ∠PRQ + 34º, then what is the measure of ∠QPR ?
आधुनिक उपयोग के लिए टेबलवेयर जैसी उच्च चमक वाली विशेषीकृत चमकदार वस्तुएँ उत्तर प्रदेश के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में उत्पादित की जाती हैं?
एक्सटर्नल कम्बश्चन इंजन में ईंधन जलाने का स्थान होता है–
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक): निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए। स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं। वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो। चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है। आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है। इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है। व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है। यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है। चरित्र की रक्षा का अर्थ है–काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना। स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है
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