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Q: ‘‘एकं सद् बहुधा भवति’’–इति मान्यता कुत्र प्राप्यते?
  • A. पुराणेषु
  • B. वेदेषु
  • C. रामायणे
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम्
  • E. उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति
Correct Answer: Option A - ‘‘न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते’’ अयं महाभारत ग्रन्थे प्राप्यते। यह सूक्ति महाभारत ग्रन्थ में प्राप्त होती है। महाभारत 18 पर्वों में विभक्त है। इसमें एक लाख श्लोक प्राप्त होते हैं। धर्मे अर्थे च कामे च मोक्षे च भारतर्षभ। यदस्ति तत् सर्वत्र यन्नेहास्ति न तत् क्वचित्।।
A. ‘‘न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते’’ अयं महाभारत ग्रन्थे प्राप्यते। यह सूक्ति महाभारत ग्रन्थ में प्राप्त होती है। महाभारत 18 पर्वों में विभक्त है। इसमें एक लाख श्लोक प्राप्त होते हैं। धर्मे अर्थे च कामे च मोक्षे च भारतर्षभ। यदस्ति तत् सर्वत्र यन्नेहास्ति न तत् क्वचित्।।

Explanations:

‘‘न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते’’ अयं महाभारत ग्रन्थे प्राप्यते। यह सूक्ति महाभारत ग्रन्थ में प्राप्त होती है। महाभारत 18 पर्वों में विभक्त है। इसमें एक लाख श्लोक प्राप्त होते हैं। धर्मे अर्थे च कामे च मोक्षे च भारतर्षभ। यदस्ति तत् सर्वत्र यन्नेहास्ति न तत् क्वचित्।।