search
Q: Earthworm responds positively towards केंचुआ किसके प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाता है?
  • A. Light/प्रकाश
  • B. Gravity/गुरूत्व
  • C. Chemicals/रसायन
  • D. None of these/ इनमें से कोई नही
Correct Answer: Option C - केंचुआ में सुविकसित संवेदी अंग या ग्राहक अंग (Receptor organs) पाये जाते है। यह रासायन (Chemical) के प्रति धनात्मक (Positive) अनुक्रिया देते है। केंचुए के देहभित्ति की एपिडर्मिस मेें जगह-जगह स्तम्भी एवं सँकरी संवेदी कोशिकाओें (Sensory Cells) के छोटे-छोटे समूह होते है। इनके ऊपर की उपचर्म कुछ उभरी हुई होती है। प्रत्येक समूह में, कई पृथम संवेदी कोशिकाएँ होती है। इनके स्वतन्त्र सिरों पर संवेदी रोम (Sensarys hairs) एवं मध्य में केन्द्रक होता है तथा आधार सिरे से तन्त्रिका तन्तु जुड़े होते है। ये स्पर्श-ज्ञान एवं रासायनिक ज्ञान के संवेदाग होते है। स्पष्ट स्पर्श से ही नहीं, वरन् आस-पास की भूमि पर अन्य जन्तुओं के चलने-फिरने से उत्पन्न कम्पन से भी ये प्रभावित हो जाते है।
C. केंचुआ में सुविकसित संवेदी अंग या ग्राहक अंग (Receptor organs) पाये जाते है। यह रासायन (Chemical) के प्रति धनात्मक (Positive) अनुक्रिया देते है। केंचुए के देहभित्ति की एपिडर्मिस मेें जगह-जगह स्तम्भी एवं सँकरी संवेदी कोशिकाओें (Sensory Cells) के छोटे-छोटे समूह होते है। इनके ऊपर की उपचर्म कुछ उभरी हुई होती है। प्रत्येक समूह में, कई पृथम संवेदी कोशिकाएँ होती है। इनके स्वतन्त्र सिरों पर संवेदी रोम (Sensarys hairs) एवं मध्य में केन्द्रक होता है तथा आधार सिरे से तन्त्रिका तन्तु जुड़े होते है। ये स्पर्श-ज्ञान एवं रासायनिक ज्ञान के संवेदाग होते है। स्पष्ट स्पर्श से ही नहीं, वरन् आस-पास की भूमि पर अन्य जन्तुओं के चलने-फिरने से उत्पन्न कम्पन से भी ये प्रभावित हो जाते है।

Explanations:

केंचुआ में सुविकसित संवेदी अंग या ग्राहक अंग (Receptor organs) पाये जाते है। यह रासायन (Chemical) के प्रति धनात्मक (Positive) अनुक्रिया देते है। केंचुए के देहभित्ति की एपिडर्मिस मेें जगह-जगह स्तम्भी एवं सँकरी संवेदी कोशिकाओें (Sensory Cells) के छोटे-छोटे समूह होते है। इनके ऊपर की उपचर्म कुछ उभरी हुई होती है। प्रत्येक समूह में, कई पृथम संवेदी कोशिकाएँ होती है। इनके स्वतन्त्र सिरों पर संवेदी रोम (Sensarys hairs) एवं मध्य में केन्द्रक होता है तथा आधार सिरे से तन्त्रिका तन्तु जुड़े होते है। ये स्पर्श-ज्ञान एवं रासायनिक ज्ञान के संवेदाग होते है। स्पष्ट स्पर्श से ही नहीं, वरन् आस-पास की भूमि पर अन्य जन्तुओं के चलने-फिरने से उत्पन्न कम्पन से भी ये प्रभावित हो जाते है।