Correct Answer:
Option C - रेल का व्याकुंचन (Buckling of rail)- जिस ट्रैक-लम्बाई में रेलों के प्रसार जोड़ में रिक्त अपर्याप्त होती है और गर्म ऋतु में रेलों की लम्बाई की दिशा में वांछित मुक्त प्रसार नहीं मिल पाता है, रेल पाश्र्व में झुक जाती है, इसे रेल का व्याकुंचन कहते हैं।
■ रेल के व्यांकुचन को फिस बोल्टो को ठीक तरह से न कसने पर, ट्रैक में धातु के स्लीपर लगाने तथा रेल जोड़ो पर समय-समय पर स्नेहक (Lubricant) लगाने से व्यांकुचन को रोका जा सकता है।
C. रेल का व्याकुंचन (Buckling of rail)- जिस ट्रैक-लम्बाई में रेलों के प्रसार जोड़ में रिक्त अपर्याप्त होती है और गर्म ऋतु में रेलों की लम्बाई की दिशा में वांछित मुक्त प्रसार नहीं मिल पाता है, रेल पाश्र्व में झुक जाती है, इसे रेल का व्याकुंचन कहते हैं।
■ रेल के व्यांकुचन को फिस बोल्टो को ठीक तरह से न कसने पर, ट्रैक में धातु के स्लीपर लगाने तथा रेल जोड़ो पर समय-समय पर स्नेहक (Lubricant) लगाने से व्यांकुचन को रोका जा सकता है।