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Q: Dilwara Jain temple is situated in which of the following place? दिलवाड़ा जैन मंदिर निम्नलिखित में से किस स्थान पर स्थित है?
  • A. Jaisalmer/जैसलमेर
  • B. Bhopal/भोपाल
  • C. Mount Abu/माउंट आबू
  • D. Gwalior/ग्वालियर
Correct Answer: Option C - दिलवाड़ा मंदिर या देलवाड़ा मंदिर पाँच मंदिरों का एक समूह है। ये राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू नगर में स्थित है इन ‘मंदिरों’ का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवी शताब्दी के बीच हुआ था। यह मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों को समर्पित हैं- दिलवाड़ा के मंदिरों में ‘विमल शाही मंदिर’ प्रथम तीर्थंकर को समर्पित सर्वाधिक प्राचीन है जो 1031 ई. में बना था 22वें तीर्थंकर नेमीनाथ को समर्पित ‘लुन वासाही मंदिर’ भी काफी लोकप्रिय है। यह मंदिर 1231 ई. में वास्तुपाल और तेजपाल नामक दो भाईयों द्वारा बनवाया गया था। दिलवाड़ा जैन मंदिर परिसर में पाँचवाँ मंदिर संगमरमर का है। मंदिरों से लगी 48 स्तम्भों में नृत्यांगनाओं की आकृतियाँ बनी हुई हैं। दिलवाड़ा के मंदिर और मूर्तियाँ मंदिर निर्माण कला का उत्तम उदाहरण हैं।
C. दिलवाड़ा मंदिर या देलवाड़ा मंदिर पाँच मंदिरों का एक समूह है। ये राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू नगर में स्थित है इन ‘मंदिरों’ का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवी शताब्दी के बीच हुआ था। यह मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों को समर्पित हैं- दिलवाड़ा के मंदिरों में ‘विमल शाही मंदिर’ प्रथम तीर्थंकर को समर्पित सर्वाधिक प्राचीन है जो 1031 ई. में बना था 22वें तीर्थंकर नेमीनाथ को समर्पित ‘लुन वासाही मंदिर’ भी काफी लोकप्रिय है। यह मंदिर 1231 ई. में वास्तुपाल और तेजपाल नामक दो भाईयों द्वारा बनवाया गया था। दिलवाड़ा जैन मंदिर परिसर में पाँचवाँ मंदिर संगमरमर का है। मंदिरों से लगी 48 स्तम्भों में नृत्यांगनाओं की आकृतियाँ बनी हुई हैं। दिलवाड़ा के मंदिर और मूर्तियाँ मंदिर निर्माण कला का उत्तम उदाहरण हैं।

Explanations:

दिलवाड़ा मंदिर या देलवाड़ा मंदिर पाँच मंदिरों का एक समूह है। ये राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू नगर में स्थित है इन ‘मंदिरों’ का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवी शताब्दी के बीच हुआ था। यह मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों को समर्पित हैं- दिलवाड़ा के मंदिरों में ‘विमल शाही मंदिर’ प्रथम तीर्थंकर को समर्पित सर्वाधिक प्राचीन है जो 1031 ई. में बना था 22वें तीर्थंकर नेमीनाथ को समर्पित ‘लुन वासाही मंदिर’ भी काफी लोकप्रिय है। यह मंदिर 1231 ई. में वास्तुपाल और तेजपाल नामक दो भाईयों द्वारा बनवाया गया था। दिलवाड़ा जैन मंदिर परिसर में पाँचवाँ मंदिर संगमरमर का है। मंदिरों से लगी 48 स्तम्भों में नृत्यांगनाओं की आकृतियाँ बनी हुई हैं। दिलवाड़ा के मंदिर और मूर्तियाँ मंदिर निर्माण कला का उत्तम उदाहरण हैं।