Correct Answer:
Option B - दक्कन के किसान विद्रोह को मुख्य रूप से मारवाड़ी और गुजराती साहूकारों के खिलाफ था। रैय्यतवाड़ी व्यवस्था के अन्तर्गत रैय्यतों को भारी कराधान का सामना करना पड़ा। वर्ष 1874 में रैयतों ने साहूकारों के खिलाफ एक सामाजिक बहिष्कार आंदोलन का आयोजन किया। यह सामाजिक बहिष्कार पूना, अहमदनगर, सोलापुर, और सतारा के गाँवों में तेजी से फैल गया। सरकार इस आंदोलन को दबाने में सफल रही। सुलह के उपाय के रूप में दक्कन कृषक राहत अधिनियम 1879 में पारित किया गया।
B. दक्कन के किसान विद्रोह को मुख्य रूप से मारवाड़ी और गुजराती साहूकारों के खिलाफ था। रैय्यतवाड़ी व्यवस्था के अन्तर्गत रैय्यतों को भारी कराधान का सामना करना पड़ा। वर्ष 1874 में रैयतों ने साहूकारों के खिलाफ एक सामाजिक बहिष्कार आंदोलन का आयोजन किया। यह सामाजिक बहिष्कार पूना, अहमदनगर, सोलापुर, और सतारा के गाँवों में तेजी से फैल गया। सरकार इस आंदोलन को दबाने में सफल रही। सुलह के उपाय के रूप में दक्कन कृषक राहत अधिनियम 1879 में पारित किया गया।