Correct Answer:
Option A - डाई पेनिट्रेट टेस्टिंग का प्रयोग केवल सतह पर दोष का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।
इस टेस्टिंग में एक लिक्विड पेनिट्रेट डाई, जाँच की जाने वाली वस्तु पर उड़ेली जाती है। कैपिलरी प्रक्रिया के द्वारा लिक्विड, मैटेरियल के दोषों में रिस जाता है। ऐसा करने से क्रेक को देखना बहुत आसान हो जाता है। इसका प्रयोग व्रेâक, छेद और अन्य सतह पर दोषों को जाँचने के लिए किया जा सकता है।
A. डाई पेनिट्रेट टेस्टिंग का प्रयोग केवल सतह पर दोष का पता लगाने के लिए किया जा सकता है।
इस टेस्टिंग में एक लिक्विड पेनिट्रेट डाई, जाँच की जाने वाली वस्तु पर उड़ेली जाती है। कैपिलरी प्रक्रिया के द्वारा लिक्विड, मैटेरियल के दोषों में रिस जाता है। ऐसा करने से क्रेक को देखना बहुत आसान हो जाता है। इसका प्रयोग व्रेâक, छेद और अन्य सतह पर दोषों को जाँचने के लिए किया जा सकता है।