Correct Answer:
Option A - डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल के अनुसार रामचन्द्रिका ‘फुटकल कवित्तों का संग्रह’ है।
• रामस्वरूप चतुर्वेदी ने रामचन्दिका को ‘छन्दों का अजायबघर’ कहा है।
• रामचन्द्र शुक्ल ने केशवदास जी को ‘कठिन काव्य का प्रेत’ कहा है।
• नाभादास ने केशवदास को ‘उडगन केशवदास’ कहा है।
• डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल स्वतन्त्र भारत के प्रथम शोध छात्र थे। इनका शोध कार्य ‘‘हिन्दी काव्य में निर्गुणवाद’’ (1933) शीर्षक से है। इनके प्रमुख ग्रंथ हैं-
1. रामानन्द की हिन्दी रचनाएँ
2. डॉ. बड़थ्वाल के श्रेष्ठ निबन्ध (सं. भी गोविन्द चातक)
3. गोरखवाणी
4. सूरदास जीवन सामग्री
5. मकरंद (सं. डॉ. भगीरथ मिश्र)
6. हिन्दी साहित्य में उपासना का स्वरूप
7. कवि केशवदास इत्यादि।
A. डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल के अनुसार रामचन्द्रिका ‘फुटकल कवित्तों का संग्रह’ है।
• रामस्वरूप चतुर्वेदी ने रामचन्दिका को ‘छन्दों का अजायबघर’ कहा है।
• रामचन्द्र शुक्ल ने केशवदास जी को ‘कठिन काव्य का प्रेत’ कहा है।
• नाभादास ने केशवदास को ‘उडगन केशवदास’ कहा है।
• डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल स्वतन्त्र भारत के प्रथम शोध छात्र थे। इनका शोध कार्य ‘‘हिन्दी काव्य में निर्गुणवाद’’ (1933) शीर्षक से है। इनके प्रमुख ग्रंथ हैं-
1. रामानन्द की हिन्दी रचनाएँ
2. डॉ. बड़थ्वाल के श्रेष्ठ निबन्ध (सं. भी गोविन्द चातक)
3. गोरखवाणी
4. सूरदास जीवन सामग्री
5. मकरंद (सं. डॉ. भगीरथ मिश्र)
6. हिन्दी साहित्य में उपासना का स्वरूप
7. कवि केशवदास इत्यादि।