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Q: Credit notes received for goods returned to a supplier will be entered firstly in the सप्लायर को माल की वापसी के लिए प्राप्त क्रेडिट नोट की प्रविष्टि पहले निम्नलिखित में की जाती है
  • A. general journal सामान्य खाताबही
  • B. returns inwards journal वापसी आवक खाताबही
  • C. returns outwards journal वापसी जावक खाताबही
  • D. petty cash journal खुदरा रोकड़ खाताबही
Correct Answer: Option C - सप्लायर को माल की वापसी के लिए प्राप्त क्रेडिट नोट की प्रवृष्टि सर्वप्रथम वापसी जावक खाताबही में की जाती है। इस बही को क्रय वापसी बही भी कहा जाता है। जब क्रेता द्वारा किसी कारणवश उधार क्रय किये गये माल को पूर्णत: या अंशत: विक्रेता को वापस कर दिया जाता है उसे क्रय वापसी पुस्तक या बाह्य वापसी पुस्तक कहते हैं। क्रय किये गये माल की वापसी के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। (1) माल का आदेशित मात्रा से कम या अधिक प्राप्त होना। (2) माल का नमूने अथवा आदेश एवं विवरण के अनुसार प्राप्त न होना। (3) बीजक में अधिक मूल्य लग जाना। (4) माल का उचित संवेदन (पैकिंग) के अभाव में क्षतिग्रस्त स्थिति में प्राप्त होना।
C. सप्लायर को माल की वापसी के लिए प्राप्त क्रेडिट नोट की प्रवृष्टि सर्वप्रथम वापसी जावक खाताबही में की जाती है। इस बही को क्रय वापसी बही भी कहा जाता है। जब क्रेता द्वारा किसी कारणवश उधार क्रय किये गये माल को पूर्णत: या अंशत: विक्रेता को वापस कर दिया जाता है उसे क्रय वापसी पुस्तक या बाह्य वापसी पुस्तक कहते हैं। क्रय किये गये माल की वापसी के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। (1) माल का आदेशित मात्रा से कम या अधिक प्राप्त होना। (2) माल का नमूने अथवा आदेश एवं विवरण के अनुसार प्राप्त न होना। (3) बीजक में अधिक मूल्य लग जाना। (4) माल का उचित संवेदन (पैकिंग) के अभाव में क्षतिग्रस्त स्थिति में प्राप्त होना।

Explanations:

सप्लायर को माल की वापसी के लिए प्राप्त क्रेडिट नोट की प्रवृष्टि सर्वप्रथम वापसी जावक खाताबही में की जाती है। इस बही को क्रय वापसी बही भी कहा जाता है। जब क्रेता द्वारा किसी कारणवश उधार क्रय किये गये माल को पूर्णत: या अंशत: विक्रेता को वापस कर दिया जाता है उसे क्रय वापसी पुस्तक या बाह्य वापसी पुस्तक कहते हैं। क्रय किये गये माल की वापसी के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। (1) माल का आदेशित मात्रा से कम या अधिक प्राप्त होना। (2) माल का नमूने अथवा आदेश एवं विवरण के अनुसार प्राप्त न होना। (3) बीजक में अधिक मूल्य लग जाना। (4) माल का उचित संवेदन (पैकिंग) के अभाव में क्षतिग्रस्त स्थिति में प्राप्त होना।