Correct Answer:
Option C - ‘महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत’ का प्रतिपादन प्रसिद्ध जलवायुवेत्ता एवं भूगर्भशास्त्री जर्मन विद्वान अल्फ्रेड वेगनर ने सन् 1912 ई. में प्रस्तुत किया परन्तु इसका विवेचना सन् 1915 ई. तथा 1920 ई. में हुआ। वेगनर ने माना कि कार्बोनिफेरस युग में समस्त स्थल भाग आपस में संलग्न थे इस स्थल पिंड को वेगनर ने पैंजिया कहा, पैंजिया के चारो ओर विशाल जल भाग था जिसे वेगनर ने पैंथालासा कहा। पैंजिया का उत्तरी भाग लॉरेशिया तथा दक्षिणी भाग गोण्डवाना को प्रदर्शित करता है। पैंजिया में तीन परतें थी सियाल, सिमा एवं निफे। सियाल बिना किसी रुकावट के सीमा पर तैर रहा था। आगे चलकर पैंजिया का विभाजन हो गया परिणामस्वरूप महासागरों तथा महाद्वीपों का वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ।
नोट– पैंजिया का विभंजन कार्बोनिपेâरस युग से प्रारम्भ हुआ तथा गोण्डवाना लैण्ड का विभंजन जुरैसिक युग में हुआ।
C. ‘महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत’ का प्रतिपादन प्रसिद्ध जलवायुवेत्ता एवं भूगर्भशास्त्री जर्मन विद्वान अल्फ्रेड वेगनर ने सन् 1912 ई. में प्रस्तुत किया परन्तु इसका विवेचना सन् 1915 ई. तथा 1920 ई. में हुआ। वेगनर ने माना कि कार्बोनिफेरस युग में समस्त स्थल भाग आपस में संलग्न थे इस स्थल पिंड को वेगनर ने पैंजिया कहा, पैंजिया के चारो ओर विशाल जल भाग था जिसे वेगनर ने पैंथालासा कहा। पैंजिया का उत्तरी भाग लॉरेशिया तथा दक्षिणी भाग गोण्डवाना को प्रदर्शित करता है। पैंजिया में तीन परतें थी सियाल, सिमा एवं निफे। सियाल बिना किसी रुकावट के सीमा पर तैर रहा था। आगे चलकर पैंजिया का विभाजन हो गया परिणामस्वरूप महासागरों तथा महाद्वीपों का वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ।
नोट– पैंजिया का विभंजन कार्बोनिपेâरस युग से प्रारम्भ हुआ तथा गोण्डवाना लैण्ड का विभंजन जुरैसिक युग में हुआ।