Correct Answer:
Option A - हैदर अली की मृत्यु के बाद 1782 ई. में टीपू ‘मैसूर’ का शासक बना। उसने मैसूर राज्य में कई आधुनिक क्रान्तिकारी परिवर्तन किये। इसीलिए `थामस मुनरो' नामक एक अंग्रेज ने टीपू को `नई रीति चलाने वाला अशान्त आत्मा' कहा। उसने व्यापार, वाणिज्य एवं अन्य सम्बन्धों को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों में दूतावासों की स्थापना की। अपने नाम के सिक्के चलाये, वर्षों एवं कैलेण्डरों के हिन्दू नामों को परिवर्तित कर उन्हें अरबी में लिपि बद्ध कराया। उसने अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में स्वतन्त्रता का वृक्ष लगाया। वह फ्रांसीसी सिद्धांतों से बहुत प्रभावित था। फ्रांस एवं कुस्तुनतुनिया का समर्थन प्राप्त करने के लिए वहाँ पर उसने दूत भेजे थे। इसके दो हिन्दू मंत्री पण्डित पूर्निया एवं कृष्णाराव थे। शृंगेरी के मुख्य पुरोहित की प्रार्थना पर टीपू ने मंदिर की मरम्मत के लिए तथा शारदा देवी की मूर्ति स्थापना के लिए धन दिया। आधुनिक यूरोपीय पद्धति पर अपनी सैन्य व्यवस्था को मजबूत किया। टीपू सुल्तान ‘जैकोबिन क्लब’ का एक सदस्य था।
A. हैदर अली की मृत्यु के बाद 1782 ई. में टीपू ‘मैसूर’ का शासक बना। उसने मैसूर राज्य में कई आधुनिक क्रान्तिकारी परिवर्तन किये। इसीलिए `थामस मुनरो' नामक एक अंग्रेज ने टीपू को `नई रीति चलाने वाला अशान्त आत्मा' कहा। उसने व्यापार, वाणिज्य एवं अन्य सम्बन्धों को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों में दूतावासों की स्थापना की। अपने नाम के सिक्के चलाये, वर्षों एवं कैलेण्डरों के हिन्दू नामों को परिवर्तित कर उन्हें अरबी में लिपि बद्ध कराया। उसने अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में स्वतन्त्रता का वृक्ष लगाया। वह फ्रांसीसी सिद्धांतों से बहुत प्रभावित था। फ्रांस एवं कुस्तुनतुनिया का समर्थन प्राप्त करने के लिए वहाँ पर उसने दूत भेजे थे। इसके दो हिन्दू मंत्री पण्डित पूर्निया एवं कृष्णाराव थे। शृंगेरी के मुख्य पुरोहित की प्रार्थना पर टीपू ने मंदिर की मरम्मत के लिए तथा शारदा देवी की मूर्ति स्थापना के लिए धन दिया। आधुनिक यूरोपीय पद्धति पर अपनी सैन्य व्यवस्था को मजबूत किया। टीपू सुल्तान ‘जैकोबिन क्लब’ का एक सदस्य था।