Correct Answer:
Option D - संविधान के अनुच्छेद-356 के अनुसार किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को प्रतिवेदन मिलने पर अथवा राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे उस राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता तो उस राज्य पर राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति शासन आरोपित किया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद-200 के अंतर्गत राज्यपाल, राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक पर अपनी अनुमति रोक सकता है, किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित कर सकता है तथा धन विधेयक के अतिरिक्त किसी विधेयक को विधान मण्डल के पुनर्विचारार्थ लौटा सकता है। उपरोक्त दोनों शक्तियाँ राज्यपाल को दी गई विवेकाधीन शक्तियाँ हैं।
D. संविधान के अनुच्छेद-356 के अनुसार किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को प्रतिवेदन मिलने पर अथवा राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे उस राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता तो उस राज्य पर राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति शासन आरोपित किया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद-200 के अंतर्गत राज्यपाल, राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक पर अपनी अनुमति रोक सकता है, किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित कर सकता है तथा धन विधेयक के अतिरिक्त किसी विधेयक को विधान मण्डल के पुनर्विचारार्थ लौटा सकता है। उपरोक्त दोनों शक्तियाँ राज्यपाल को दी गई विवेकाधीन शक्तियाँ हैं।