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Q: Consider the following statements about Madam Bhikaji Cama:/मैडम भीकाजी कामा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. Madam Cama unfurled the National Flag at the international Socialist Conference in Paris in the year 1907/मैडम कामा ने वर्ष 1907 में पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सोशलिस्ट सम्मेलन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। 2. Madam Cama served as private secretary to Dadabhai Naoroji/मैडम कामा दादाभाई नौरोजी की निजी सचिव रहीं। 3. Madam Cama was born to Parsi parents मैडम कामा के माता-पिता पारसी थे। Which of the statements given above is/are correct?/उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
  • A. 1, 2 and 3/1, 2 तथा 3
  • B. 2 and 3, only/केवल 2 तथा 3
  • C. 1 and 2, only/केवल 1 तथा 2
  • D. 3 only/केवल 3
Correct Answer: Option B - मैडम भीकाजी रूस्तम कामा भारत की सुविख्यात महिला क्रांतिकारी थी। इन्होंने राष्ट्रवादियों तथा क्रांतिकारियों यथा दादाभाई नौरोजी, श्यामजी कृष्ण वर्मा, वीर सावरकर, सरदार सिंह राना आदि के साथ मिलकर कार्य किया। यह रूसी क्रांतिकारियों के सम्पर्क में भी आई थीं तथा उनके साथ इन्होंने पत्राचार भी किया, जिसने इन्हें मास्को आने का निमंत्रण दिया। इनका जन्म 24 सितम्बर, 1861 ई. को हुआ था तथा माता-पिता पारसी थे। उनके पिता का नाम सोराबजी फ्रामजी पटेल था। रूस्तम के.आर. कामा उनके पति थे। कामा ने दादाभाई नौरोजी के निजी सचिव के रूप में भी काम किया। 1909 से पेरिस उनका मुख्यालय हो गया। 1907 ई. में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टुटगार्ड या स्टुटगार्ट में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में भी भाग लिया जहाँ इन्होंने प्रथम भारतीय राष्ट्रीय झण्डे को फहराया जिसकी डिजाइन स्वयं तैयार की थी यही वस्तुत: स्वतंत्र भारत के झण्डे का मूल रूप था। झण्डे में हरा, पीला तथा केसरिया के स्थान पर लाल रंग था। इस क्रांतिकारिता के कारण मैडम भीकाजी कामा को ‘भारतीय क्रांतिकारियों की जननी’ कहा गया है। मैडम भीकाजी कामा, एम. बरकतुल्ला, वी. पी. एस. अय्यर और एम. एन. राय सभी प्रमुख क्रन्तिकारी थे और स्वतंत्रता आन्दोलन की अवधि में भारत से बाहर विविध देशों में काम कर रहे थे।
B. मैडम भीकाजी रूस्तम कामा भारत की सुविख्यात महिला क्रांतिकारी थी। इन्होंने राष्ट्रवादियों तथा क्रांतिकारियों यथा दादाभाई नौरोजी, श्यामजी कृष्ण वर्मा, वीर सावरकर, सरदार सिंह राना आदि के साथ मिलकर कार्य किया। यह रूसी क्रांतिकारियों के सम्पर्क में भी आई थीं तथा उनके साथ इन्होंने पत्राचार भी किया, जिसने इन्हें मास्को आने का निमंत्रण दिया। इनका जन्म 24 सितम्बर, 1861 ई. को हुआ था तथा माता-पिता पारसी थे। उनके पिता का नाम सोराबजी फ्रामजी पटेल था। रूस्तम के.आर. कामा उनके पति थे। कामा ने दादाभाई नौरोजी के निजी सचिव के रूप में भी काम किया। 1909 से पेरिस उनका मुख्यालय हो गया। 1907 ई. में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टुटगार्ड या स्टुटगार्ट में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में भी भाग लिया जहाँ इन्होंने प्रथम भारतीय राष्ट्रीय झण्डे को फहराया जिसकी डिजाइन स्वयं तैयार की थी यही वस्तुत: स्वतंत्र भारत के झण्डे का मूल रूप था। झण्डे में हरा, पीला तथा केसरिया के स्थान पर लाल रंग था। इस क्रांतिकारिता के कारण मैडम भीकाजी कामा को ‘भारतीय क्रांतिकारियों की जननी’ कहा गया है। मैडम भीकाजी कामा, एम. बरकतुल्ला, वी. पी. एस. अय्यर और एम. एन. राय सभी प्रमुख क्रन्तिकारी थे और स्वतंत्रता आन्दोलन की अवधि में भारत से बाहर विविध देशों में काम कर रहे थे।

Explanations:

मैडम भीकाजी रूस्तम कामा भारत की सुविख्यात महिला क्रांतिकारी थी। इन्होंने राष्ट्रवादियों तथा क्रांतिकारियों यथा दादाभाई नौरोजी, श्यामजी कृष्ण वर्मा, वीर सावरकर, सरदार सिंह राना आदि के साथ मिलकर कार्य किया। यह रूसी क्रांतिकारियों के सम्पर्क में भी आई थीं तथा उनके साथ इन्होंने पत्राचार भी किया, जिसने इन्हें मास्को आने का निमंत्रण दिया। इनका जन्म 24 सितम्बर, 1861 ई. को हुआ था तथा माता-पिता पारसी थे। उनके पिता का नाम सोराबजी फ्रामजी पटेल था। रूस्तम के.आर. कामा उनके पति थे। कामा ने दादाभाई नौरोजी के निजी सचिव के रूप में भी काम किया। 1909 से पेरिस उनका मुख्यालय हो गया। 1907 ई. में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टुटगार्ड या स्टुटगार्ट में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में भी भाग लिया जहाँ इन्होंने प्रथम भारतीय राष्ट्रीय झण्डे को फहराया जिसकी डिजाइन स्वयं तैयार की थी यही वस्तुत: स्वतंत्र भारत के झण्डे का मूल रूप था। झण्डे में हरा, पीला तथा केसरिया के स्थान पर लाल रंग था। इस क्रांतिकारिता के कारण मैडम भीकाजी कामा को ‘भारतीय क्रांतिकारियों की जननी’ कहा गया है। मैडम भीकाजी कामा, एम. बरकतुल्ला, वी. पी. एस. अय्यर और एम. एन. राय सभी प्रमुख क्रन्तिकारी थे और स्वतंत्रता आन्दोलन की अवधि में भारत से बाहर विविध देशों में काम कर रहे थे।