Correct Answer:
Option C - आलम्ब के निकट धरन के एक भाग की तुलना में एक शुद्धालम्बित RCC आयताकार धरन में कर्तन प्रबलन के रूप में प्रयुक्त ऊर्ध्वाधर छल्लों का अन्तराल धरन की लम्बाई के साथ मध्य भाग में बढ़ा दिया जाता है।
■ प्रास धरन में भार आने पर प्रास-धरन का मुक्त सिरा नीचे को झुकता है। इसके कारण इसकी उपरी परतों में तनन प्रतिबल (सामान्य धरन के विपरीत) उत्पन्न होते है। इसी कारण प्रास धरन में उदासीन अक्ष के ऊपर तनन प्रबलन दिया जाता है। (जबकि सामान्य धरन में तनन प्रबलन उदासीन अक्ष से नीचे दिया जाता है) तनन छड़ों को प्रास धरन की ऊपरी सतह के पास कंक्रीट का उपयुक्त आवरण देकर डाला जाता है।
C. आलम्ब के निकट धरन के एक भाग की तुलना में एक शुद्धालम्बित RCC आयताकार धरन में कर्तन प्रबलन के रूप में प्रयुक्त ऊर्ध्वाधर छल्लों का अन्तराल धरन की लम्बाई के साथ मध्य भाग में बढ़ा दिया जाता है।
■ प्रास धरन में भार आने पर प्रास-धरन का मुक्त सिरा नीचे को झुकता है। इसके कारण इसकी उपरी परतों में तनन प्रतिबल (सामान्य धरन के विपरीत) उत्पन्न होते है। इसी कारण प्रास धरन में उदासीन अक्ष के ऊपर तनन प्रबलन दिया जाता है। (जबकि सामान्य धरन में तनन प्रबलन उदासीन अक्ष से नीचे दिया जाता है) तनन छड़ों को प्रास धरन की ऊपरी सतह के पास कंक्रीट का उपयुक्त आवरण देकर डाला जाता है।