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Q: Consider the below statements with respect to the design of RCC beams and identify the correct answer./ RCC धरनों के अभिकल्पन के सम्बन्ध में नीचे दिए कथनों पर विचार करें और सही उत्तर की पहचान करें। Statement A : Spacing of shear reinforcement in a simply supported RCC rectangular beam shall be reduced at the middle portion along the length of the beam when compared to a portion of the beam near the supports./ कथन A : आलम्ब के निकट धरन के एक भाग की तुलना में एक शुद्धालम्बित RCC आयताकार धरन में कर्तन प्रबलन का अन्तराल धरन की लम्बाई के साथ मध्य भाग में कम हो जाएगा। Statement B: The position of longitudinal reinforcement shall be above the neutral axis in case of a cantilever beam subjected to uniformly distributed load directed towards down. कथन B : नीचे की ओर निर्देशित समान रूप से वितरित भार के अधीन प्रास धरन की स्थिति में अनुदैध्र्य प्रबलन की स्थिति उदासीन अक्ष से ऊपर होगी।
  • A. Both statements are incorrect/दोनों कथन असत्य है
  • B. Both statements are correct/दोनों कथन सत्य है
  • C. Statement B is correct and A is incorrect/ कथन B सत्य है और A असत्य है
  • D. Statement A is correct and B is incorrect/ कथन A सत्य है और B असत्य है
Correct Answer: Option C - आलम्ब के निकट धरन के एक भाग की तुलना में एक शुद्धालम्बित RCC आयताकार धरन में कर्तन प्रबलन के रूप में प्रयुक्त ऊर्ध्वाधर छल्लों का अन्तराल धरन की लम्बाई के साथ मध्य भाग में बढ़ा दिया जाता है। ■ प्रास धरन में भार आने पर प्रास-धरन का मुक्त सिरा नीचे को झुकता है। इसके कारण इसकी उपरी परतों में तनन प्रतिबल (सामान्य धरन के विपरीत) उत्पन्न होते है। इसी कारण प्रास धरन में उदासीन अक्ष के ऊपर तनन प्रबलन दिया जाता है। (जबकि सामान्य धरन में तनन प्रबलन उदासीन अक्ष से नीचे दिया जाता है) तनन छड़ों को प्रास धरन की ऊपरी सतह के पास कंक्रीट का उपयुक्त आवरण देकर डाला जाता है।
C. आलम्ब के निकट धरन के एक भाग की तुलना में एक शुद्धालम्बित RCC आयताकार धरन में कर्तन प्रबलन के रूप में प्रयुक्त ऊर्ध्वाधर छल्लों का अन्तराल धरन की लम्बाई के साथ मध्य भाग में बढ़ा दिया जाता है। ■ प्रास धरन में भार आने पर प्रास-धरन का मुक्त सिरा नीचे को झुकता है। इसके कारण इसकी उपरी परतों में तनन प्रतिबल (सामान्य धरन के विपरीत) उत्पन्न होते है। इसी कारण प्रास धरन में उदासीन अक्ष के ऊपर तनन प्रबलन दिया जाता है। (जबकि सामान्य धरन में तनन प्रबलन उदासीन अक्ष से नीचे दिया जाता है) तनन छड़ों को प्रास धरन की ऊपरी सतह के पास कंक्रीट का उपयुक्त आवरण देकर डाला जाता है।

Explanations:

आलम्ब के निकट धरन के एक भाग की तुलना में एक शुद्धालम्बित RCC आयताकार धरन में कर्तन प्रबलन के रूप में प्रयुक्त ऊर्ध्वाधर छल्लों का अन्तराल धरन की लम्बाई के साथ मध्य भाग में बढ़ा दिया जाता है। ■ प्रास धरन में भार आने पर प्रास-धरन का मुक्त सिरा नीचे को झुकता है। इसके कारण इसकी उपरी परतों में तनन प्रतिबल (सामान्य धरन के विपरीत) उत्पन्न होते है। इसी कारण प्रास धरन में उदासीन अक्ष के ऊपर तनन प्रबलन दिया जाता है। (जबकि सामान्य धरन में तनन प्रबलन उदासीन अक्ष से नीचे दिया जाता है) तनन छड़ों को प्रास धरन की ऊपरी सतह के पास कंक्रीट का उपयुक्त आवरण देकर डाला जाता है।