Q: Comprehension:
निम्नलिखित गद्यांश ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्नों (89-93) के उत्तर दीजिए।
लघुत्व से महत्त्व की ओर बढ़ना स्वाभिमान होने की निशानी है जबकि महत्त्व मिलने पर दूसरों को लघु समझना अभिमानी होने का प्रमाण है। अभिमान में व्यक्ति अपना प्रदर्शन कर दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करता है इसलिए लोग उससे दूर रहना चाहते है। सिर्फ चाटुकार लोग ही अपने स्वार्थ के कारण उसकी वाहवाही करते हैं। इसके विपरीत स्वाभिमानी व्यक्ति दूसरों के विचारों को महत्त्व देता है। एक जगह बाढ़ आई थी समाजसेवी संस्थाएँ बाढ़ पीड़ितो को सहायता का वितरण कर रही थीं कुछ स्वयंसेवकों ने एक वृद्धा की झोपड़ी में पहुँच कर उसे सहायता देने का प्रस्ताव रखा। उसने बड़े प्रेम से मना कर दिया। बोली-बेटा मैं पिछले बीस वर्षों से अपनी मेहनत की कमाई खा रही हूँ, मुझे आपकी सहायता नहीं चाहिए। स्वयंसेवक अवाक् थे एवं उस वृद्धा के स्वाभिमान के आगे नतमस्तक। स्वाभिमान व्यक्ति को स्वावलम्बी बनाता है। जबकि अभिमानी हमेशा दूसरों पर आश्रित रहना चाहता है। इन दोनों का मिश्रण व्यक्तित्व को बहुत जटिल बना देता है। दूसरे को कमतर आँकना एवं स्वयं को बड़ा समझना अभिमान है।
प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक क्या है?
A.
स्वावलंबन के प्रयोग
B.
सत्ता का उचित प्रयोग
C.
स्वाभिमान और अभिमान
D.
आत्ममंथन का दौर
Correct Answer:
Option C - दिये गये का उचित शीर्षक ‘स्वाभिमान और अभिमान’ है।
C. दिये गये का उचित शीर्षक ‘स्वाभिमान और अभिमान’ है।
Explanations:
दिये गये का उचित शीर्षक ‘स्वाभिमान और अभिमान’ है।
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