Correct Answer:
Option A - हिमालय की नदियों में वर्षभर जल रहता है, क्योंकि वर्षा जल के अतिरिक्त हिम के पिघलने से भी इन्हें जल की आपूर्ति होती है, ये सदानीरा नदियाँ हैं। मैदानी भागों में ढाल की न्यूनता के कारण ये विसर्पों का निर्माण करती हैं एवं प्राय: अपना मार्ग भी बदल लेती हैं। इनमें सिंचाई की ज्यादा संभावनाएँ होती है।
• प्रायद्वीपीय नदियाँ चौड़ी, लगभग संतुलित एवं उथली घाटियों से होकर बहती हैं। यहाँ वर्षा कम होती है इसलिए इन नदियों में ग्रीष्म ऋतु में जल की मात्रा कम रहती है। इन नदियों का ढाल प्रवणता अत्यन्त मंद है। सिर्फ वही हिस्से इसके अपवाद हैं, जहाँ नया भ्रंशन हुआ है।
A. हिमालय की नदियों में वर्षभर जल रहता है, क्योंकि वर्षा जल के अतिरिक्त हिम के पिघलने से भी इन्हें जल की आपूर्ति होती है, ये सदानीरा नदियाँ हैं। मैदानी भागों में ढाल की न्यूनता के कारण ये विसर्पों का निर्माण करती हैं एवं प्राय: अपना मार्ग भी बदल लेती हैं। इनमें सिंचाई की ज्यादा संभावनाएँ होती है।
• प्रायद्वीपीय नदियाँ चौड़ी, लगभग संतुलित एवं उथली घाटियों से होकर बहती हैं। यहाँ वर्षा कम होती है इसलिए इन नदियों में ग्रीष्म ऋतु में जल की मात्रा कम रहती है। इन नदियों का ढाल प्रवणता अत्यन्त मंद है। सिर्फ वही हिस्से इसके अपवाद हैं, जहाँ नया भ्रंशन हुआ है।