Correct Answer:
Option C - निलम्बित अशुद्धियों में अधिक महीन कण तथा कोलाइडी पदार्थ साधारण अवसादन से तली पर नहीं आते हैं। यह पानी में चक्कर लगाते रहते हैं, क्योंकि इनमें विद्युत चार्ज रहता है। इन अशुद्धियों को पानी से अलग करने के लिये, इसमें कुछ रसायन मिला दिये जाते हैं, जिससे जल में उर्णिका (floc) बनती है, जो इन महीन अशुद्धियों को अपनी पकड़ में लेती हुई नीचे तली पर आकर बैठ जाती है और जल निथर जाता है। इस क्रिया को स्कन्दन सहित अवसादन कहते हैं।
सकंदन (Coagulation)–जल में निलम्बित व ऋणावेशित कोलाइडी पदार्थो के शीघ्र अवसादन के लिए जो पदार्थ मिलाये जाते है सकंदक कहलाते हैं।
उदाहरण– फेरस सल्फेट , फेरिक क्लोराइड, फेरिक सल्फेट आदि।
C. निलम्बित अशुद्धियों में अधिक महीन कण तथा कोलाइडी पदार्थ साधारण अवसादन से तली पर नहीं आते हैं। यह पानी में चक्कर लगाते रहते हैं, क्योंकि इनमें विद्युत चार्ज रहता है। इन अशुद्धियों को पानी से अलग करने के लिये, इसमें कुछ रसायन मिला दिये जाते हैं, जिससे जल में उर्णिका (floc) बनती है, जो इन महीन अशुद्धियों को अपनी पकड़ में लेती हुई नीचे तली पर आकर बैठ जाती है और जल निथर जाता है। इस क्रिया को स्कन्दन सहित अवसादन कहते हैं।
सकंदन (Coagulation)–जल में निलम्बित व ऋणावेशित कोलाइडी पदार्थो के शीघ्र अवसादन के लिए जो पदार्थ मिलाये जाते है सकंदक कहलाते हैं।
उदाहरण– फेरस सल्फेट , फेरिक क्लोराइड, फेरिक सल्फेट आदि।