Correct Answer:
Option A - एक ‘निरंकुश शिक्षण’ में छात्र द्वितीयक होते हैं। शिक्षण शैली में निरंकुश शिक्षण एक पारम्परिक शैली है। ये शिक्षक-केन्द्रित या विषय-वस्तु केन्द्रित होती है। इस पद्धति में शिक्षक का छात्रों और शिक्षण पर पूरा नियंत्रण होता है। इसमें शिक्षक अधिक सक्रिय होते हैं और शिक्षार्थी निष्क्रिय श्रोता होते हैं। इसमें अधिगम की योग्यताओं, रूचियों और व्यक्तित्व पर कोई जोर नहीं दिया जाता है।
A. एक ‘निरंकुश शिक्षण’ में छात्र द्वितीयक होते हैं। शिक्षण शैली में निरंकुश शिक्षण एक पारम्परिक शैली है। ये शिक्षक-केन्द्रित या विषय-वस्तु केन्द्रित होती है। इस पद्धति में शिक्षक का छात्रों और शिक्षण पर पूरा नियंत्रण होता है। इसमें शिक्षक अधिक सक्रिय होते हैं और शिक्षार्थी निष्क्रिय श्रोता होते हैं। इसमें अधिगम की योग्यताओं, रूचियों और व्यक्तित्व पर कोई जोर नहीं दिया जाता है।