Correct Answer:
Option C - रोहिणी रोग (Diphtheria) का कारक जीव कोराइन बैक्टीरिया डिप्थीरिया (Coryne Bacterium diphtheria। इस जीवाणु का संक्रमण हो जाने से गले में झिल्लियाँ सी बन जाती हैं, जिससे श्वॉस-क्रिया बाधित होने के कारण रोगी की शीघ्र मृत्यु हो सकती है। यह रोग बच्चों में अधिक होता है।
लक्षण:- नाक का बहना, गले में दर्द, बुखार आदि रोहिणी रोग (Diphtheria) के लक्षण हैं। किन्तु गले में झिल्लियाँ बन जाना ही प्रमुख लक्षण है। इस रोग के बचाव के लिए DPT का टीका उपलब्ध है।
C. रोहिणी रोग (Diphtheria) का कारक जीव कोराइन बैक्टीरिया डिप्थीरिया (Coryne Bacterium diphtheria। इस जीवाणु का संक्रमण हो जाने से गले में झिल्लियाँ सी बन जाती हैं, जिससे श्वॉस-क्रिया बाधित होने के कारण रोगी की शीघ्र मृत्यु हो सकती है। यह रोग बच्चों में अधिक होता है।
लक्षण:- नाक का बहना, गले में दर्द, बुखार आदि रोहिणी रोग (Diphtheria) के लक्षण हैं। किन्तु गले में झिल्लियाँ बन जाना ही प्रमुख लक्षण है। इस रोग के बचाव के लिए DPT का टीका उपलब्ध है।