search
Q: ‘चंद्रालोक’ के रचनाकार है।
  • A. विश्वनाथ
  • B. राजशेखर
  • C. दण्डी
  • D. जयदेव
Correct Answer: Option D - ‘चंद्रालोक’ के रचनाकार जयदेव है। जयदेव मिथिला के निवासी थे। इनका समय 13वीं शती का उत्तराद्र्ध स्वीकार किया गया है। जयदेव साहित्य के क्षेत्र में पीयूष वर्ष तथा न्याय के क्षेत्र में पक्षधर उपाधि से प्रख्यात थे। चंद्रालोक अलंकार परक ग्रंथ है। जिसकी रचना 10 मयूखों तथा 35 अनुस्टुप श्लोकों में की। जयदेव का एक अन्य प्रसिद्ध ग्रंथ ‘गीतगोविन्द’ हैं। जिसको श्री मद्भागवत के बाद राधाकृष्ण की लीला की अनुपम साहित्य अभिव्यक्ति माना गया है गीतगोविंद गीतिकाव्य है जबकि ‘राजशेखर’ की कृति काव्यमीमांसा, ‘विश्वनाथ’ की कृति ‘साहित्य दर्पण’ तथा ‘दण्डी’ की कृति ‘काव्यादर्श’ है।
D. ‘चंद्रालोक’ के रचनाकार जयदेव है। जयदेव मिथिला के निवासी थे। इनका समय 13वीं शती का उत्तराद्र्ध स्वीकार किया गया है। जयदेव साहित्य के क्षेत्र में पीयूष वर्ष तथा न्याय के क्षेत्र में पक्षधर उपाधि से प्रख्यात थे। चंद्रालोक अलंकार परक ग्रंथ है। जिसकी रचना 10 मयूखों तथा 35 अनुस्टुप श्लोकों में की। जयदेव का एक अन्य प्रसिद्ध ग्रंथ ‘गीतगोविन्द’ हैं। जिसको श्री मद्भागवत के बाद राधाकृष्ण की लीला की अनुपम साहित्य अभिव्यक्ति माना गया है गीतगोविंद गीतिकाव्य है जबकि ‘राजशेखर’ की कृति काव्यमीमांसा, ‘विश्वनाथ’ की कृति ‘साहित्य दर्पण’ तथा ‘दण्डी’ की कृति ‘काव्यादर्श’ है।

Explanations:

‘चंद्रालोक’ के रचनाकार जयदेव है। जयदेव मिथिला के निवासी थे। इनका समय 13वीं शती का उत्तराद्र्ध स्वीकार किया गया है। जयदेव साहित्य के क्षेत्र में पीयूष वर्ष तथा न्याय के क्षेत्र में पक्षधर उपाधि से प्रख्यात थे। चंद्रालोक अलंकार परक ग्रंथ है। जिसकी रचना 10 मयूखों तथा 35 अनुस्टुप श्लोकों में की। जयदेव का एक अन्य प्रसिद्ध ग्रंथ ‘गीतगोविन्द’ हैं। जिसको श्री मद्भागवत के बाद राधाकृष्ण की लीला की अनुपम साहित्य अभिव्यक्ति माना गया है गीतगोविंद गीतिकाव्य है जबकि ‘राजशेखर’ की कृति काव्यमीमांसा, ‘विश्वनाथ’ की कृति ‘साहित्य दर्पण’ तथा ‘दण्डी’ की कृति ‘काव्यादर्श’ है।