Correct Answer:
Option D - किसी आवर्त में बायें से दायें चलने पर परमाणु त्रिज्याएं नियमित क्रम में क्षार धातु से हैलोजन तक घटती हैं, क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ने के साथ वाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी बढ़ती है, जिसके फलस्वरूप वाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनोंं को आकर्षित करने की क्षमता भी बढ़ती है। इस कारण इनकी नाभिक व वाह्यतम कोशों के बीच की दूरी क्रमश: घटती है, अत: परमाणु त्रिज्या घटती है। इस प्रकार चौथे आवर्त के हैलोजन तत्व ब्रोमीन (Br) की परमाणु त्रिज्या सबसे कम होती है।
D. किसी आवर्त में बायें से दायें चलने पर परमाणु त्रिज्याएं नियमित क्रम में क्षार धातु से हैलोजन तक घटती हैं, क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ने के साथ वाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी बढ़ती है, जिसके फलस्वरूप वाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनोंं को आकर्षित करने की क्षमता भी बढ़ती है। इस कारण इनकी नाभिक व वाह्यतम कोशों के बीच की दूरी क्रमश: घटती है, अत: परमाणु त्रिज्या घटती है। इस प्रकार चौथे आवर्त के हैलोजन तत्व ब्रोमीन (Br) की परमाणु त्रिज्या सबसे कम होती है।