Correct Answer:
Option A - समकालीन सामाजिक-संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बाल्यावस्था एक सामाजिक संरचना की अवस्था है। बाल्यावस्था में समाजीकरण की गति तीव्र हो जाती है। बालक समाज के प्रत्यक्ष संपर्क में आता है, जिसके फलस्वरूप उसका सामाजिक विकास तीव्र गति से होता है। बाल्यावस्था में समूह सदस्यता, सामाजिक गुण, बहिर्मुखी प्रवृत्ति, सामाजिक स्वीकृति की चाह, मित्र चयन आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।
A. समकालीन सामाजिक-संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बाल्यावस्था एक सामाजिक संरचना की अवस्था है। बाल्यावस्था में समाजीकरण की गति तीव्र हो जाती है। बालक समाज के प्रत्यक्ष संपर्क में आता है, जिसके फलस्वरूप उसका सामाजिक विकास तीव्र गति से होता है। बाल्यावस्था में समूह सदस्यता, सामाजिक गुण, बहिर्मुखी प्रवृत्ति, सामाजिक स्वीकृति की चाह, मित्र चयन आदि सामाजिक गुणों का विकास होता है।