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Q: ‘‘चकासतं चारुचमूरूचर्मणा’’ – अत्र चमूरू-पदेन कस्य पशो: संकेत:?
  • A. धेनो:
  • B. मृगस्य
  • C. कुक्कुटस्य
  • D. मयूरस्य
Correct Answer: Option B - ‘चकासतं-चारुचमूरूचर्मणा’ अत्र चमूरू-पदेन ‘मृगस्य’ पशो: संकेत:। अर्थात् ‘चकासतं चारुचमूरूचर्मणा’ पद्यांश महाकवि माघ द्वारा विरचित ‘शिशुपालवधम्’ नामक महाकाव्य के प्रथम सर्ग (कृष्ण नारद-सम्भाषण) से अवतरित है- इस ‘चमूरू’ शब्द से ‘मृग’ का संकेत मिलता है अत: विकल्प (b) सही है, शेष अन्य सभी विकल्प गलत हैं। शिशुपाल के प्रथम सर्ग में 5 श्लोक तथा इसमें 20 सर्ग हैं, (कुल 1650 श्लोक) इसका प्रत्येक सर्ग ‘श्री’ शब्द से आरम्भ तथा ‘श्री’ शब्द से अन्त होता है। इसके 19वें सर्ग में चित्रालंकार का वर्णन है।
B. ‘चकासतं-चारुचमूरूचर्मणा’ अत्र चमूरू-पदेन ‘मृगस्य’ पशो: संकेत:। अर्थात् ‘चकासतं चारुचमूरूचर्मणा’ पद्यांश महाकवि माघ द्वारा विरचित ‘शिशुपालवधम्’ नामक महाकाव्य के प्रथम सर्ग (कृष्ण नारद-सम्भाषण) से अवतरित है- इस ‘चमूरू’ शब्द से ‘मृग’ का संकेत मिलता है अत: विकल्प (b) सही है, शेष अन्य सभी विकल्प गलत हैं। शिशुपाल के प्रथम सर्ग में 5 श्लोक तथा इसमें 20 सर्ग हैं, (कुल 1650 श्लोक) इसका प्रत्येक सर्ग ‘श्री’ शब्द से आरम्भ तथा ‘श्री’ शब्द से अन्त होता है। इसके 19वें सर्ग में चित्रालंकार का वर्णन है।

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‘चकासतं-चारुचमूरूचर्मणा’ अत्र चमूरू-पदेन ‘मृगस्य’ पशो: संकेत:। अर्थात् ‘चकासतं चारुचमूरूचर्मणा’ पद्यांश महाकवि माघ द्वारा विरचित ‘शिशुपालवधम्’ नामक महाकाव्य के प्रथम सर्ग (कृष्ण नारद-सम्भाषण) से अवतरित है- इस ‘चमूरू’ शब्द से ‘मृग’ का संकेत मिलता है अत: विकल्प (b) सही है, शेष अन्य सभी विकल्प गलत हैं। शिशुपाल के प्रथम सर्ग में 5 श्लोक तथा इसमें 20 सर्ग हैं, (कुल 1650 श्लोक) इसका प्रत्येक सर्ग ‘श्री’ शब्द से आरम्भ तथा ‘श्री’ शब्द से अन्त होता है। इसके 19वें सर्ग में चित्रालंकार का वर्णन है।