Correct Answer:
Option A - चक्रपाणि: में बहुव्रीहि समास होगा। इस समास में कोई पद प्रधान नहीं होता, दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं तो वहाँ बहुव्रीहि समास होता है जैसे– लम्बोदर –लम्बा है उदर जिसका अर्थात् गणेश ठीक उसी तरह चक्रपाणि:– चक्र है पाणि में जिसके अर्थात् विष्णु।
द्विगु समास– जिसका पूर्व पद संख्यावाचक विशेषण हो वह द्विगु समास कहलाता है। जैसे– सप्तसिंधु, सप्ताह, त्रिलोक, दोेपहर आदि।
द्वंद्व समास– जिस समस्त पद में दोनों पद प्रधान हो तथा विग्रह करने पर और, अथवा, या, एवं, लगता हो वह द्वंद्व समास कहलाता है। जैसे– राम-सीता · राम और सीता
ऊँच-नीच = ऊँच या नीच
कर्मधारय समास– जिस समस्त पद का उत्तर पद प्रधान हो तथा पूर्वपद व उत्तरपद में उपमान-उपमेय अथवा विशेषण- विशेष्य संबंध हो कर्मधारय समास कहलाता है जैसे– चरणकमल, चंद्रमुख, नीलकंठ
A. चक्रपाणि: में बहुव्रीहि समास होगा। इस समास में कोई पद प्रधान नहीं होता, दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं तो वहाँ बहुव्रीहि समास होता है जैसे– लम्बोदर –लम्बा है उदर जिसका अर्थात् गणेश ठीक उसी तरह चक्रपाणि:– चक्र है पाणि में जिसके अर्थात् विष्णु।
द्विगु समास– जिसका पूर्व पद संख्यावाचक विशेषण हो वह द्विगु समास कहलाता है। जैसे– सप्तसिंधु, सप्ताह, त्रिलोक, दोेपहर आदि।
द्वंद्व समास– जिस समस्त पद में दोनों पद प्रधान हो तथा विग्रह करने पर और, अथवा, या, एवं, लगता हो वह द्वंद्व समास कहलाता है। जैसे– राम-सीता · राम और सीता
ऊँच-नीच = ऊँच या नीच
कर्मधारय समास– जिस समस्त पद का उत्तर पद प्रधान हो तथा पूर्वपद व उत्तरपद में उपमान-उपमेय अथवा विशेषण- विशेष्य संबंध हो कर्मधारय समास कहलाता है जैसे– चरणकमल, चंद्रमुख, नीलकंठ