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Q: चूडाकर्णो नागदन्तके किं वस्तु अवस्थाप्य स्वपिति ?
  • A. रिक्तं भिक्षापात्रम्
  • B. अवशिष्टभिक्षान्नसहितं भिक्षापात्रम्
  • C. सुदीर्घाद् रक्षितं स्वर्णपात्रम्
  • D. भिक्षायां प्राप्तं रजतपात्रम्
Correct Answer: Option B - चूडाकर्णो नागदन्तके अवशिष्टfभक्षान्नसहितं भिक्षापाप्तं वस्तु अवस्थाप्य स्वपिति। अर्थात् चूडाकर्ण नागदन्तक मे बचे हुए भिक्षान्न सहित भिक्षा पाप्त रूपी वस्तु को रखकर सोता है। चूड़ाकर्ण परिव्राजक (संन्यासी) था। भिक्षापाप्तम् षष्ठी तत्पुरुष समास है। जिसका विग्रह भिक्षाया: पाप्तम् होगा।
B. चूडाकर्णो नागदन्तके अवशिष्टfभक्षान्नसहितं भिक्षापाप्तं वस्तु अवस्थाप्य स्वपिति। अर्थात् चूडाकर्ण नागदन्तक मे बचे हुए भिक्षान्न सहित भिक्षा पाप्त रूपी वस्तु को रखकर सोता है। चूड़ाकर्ण परिव्राजक (संन्यासी) था। भिक्षापाप्तम् षष्ठी तत्पुरुष समास है। जिसका विग्रह भिक्षाया: पाप्तम् होगा।

Explanations:

चूडाकर्णो नागदन्तके अवशिष्टfभक्षान्नसहितं भिक्षापाप्तं वस्तु अवस्थाप्य स्वपिति। अर्थात् चूडाकर्ण नागदन्तक मे बचे हुए भिक्षान्न सहित भिक्षा पाप्त रूपी वस्तु को रखकर सोता है। चूड़ाकर्ण परिव्राजक (संन्यासी) था। भिक्षापाप्तम् षष्ठी तत्पुरुष समास है। जिसका विग्रह भिक्षाया: पाप्तम् होगा।