Correct Answer:
Option C - संवेग एक जटिल भाव की अवस्था होती है जिसमें कुछ शारीरिक एवं ग्रन्थीय क्रियाएँ होती हैं। बेरान,बर्न तथा कैण्टोविज (1980) के अनुसार, ‘‘संवेग से तात्पर्य एक ऐसी आत्मनिष्ठ भाव की अवस्था से होता है, जिसमें कुछ शारीरिक उत्तेजना पैदा होती है और फिर जिसमें कुछ व्यवहार शामिल होते हैं। ‘‘संवेग व्यक्ति के सामाजिक विकास को प्रभावित करता है। यह सामाजिक मूल्यांकन तथा आत्म-मूल्यांकन का एक माध्यम होता है। अपने स्वयं के संवेग को समझने से बच्चों को सामाजिक परिस्थितियों में अपने स्वयं के व्यवहार का मार्गदर्शन करने में मदद मिलती है। भावनाओं के बारे में बात करने से व्यक्ति को संवेग को समझने में काफी मदद मिल जाती है।
C. संवेग एक जटिल भाव की अवस्था होती है जिसमें कुछ शारीरिक एवं ग्रन्थीय क्रियाएँ होती हैं। बेरान,बर्न तथा कैण्टोविज (1980) के अनुसार, ‘‘संवेग से तात्पर्य एक ऐसी आत्मनिष्ठ भाव की अवस्था से होता है, जिसमें कुछ शारीरिक उत्तेजना पैदा होती है और फिर जिसमें कुछ व्यवहार शामिल होते हैं। ‘‘संवेग व्यक्ति के सामाजिक विकास को प्रभावित करता है। यह सामाजिक मूल्यांकन तथा आत्म-मूल्यांकन का एक माध्यम होता है। अपने स्वयं के संवेग को समझने से बच्चों को सामाजिक परिस्थितियों में अपने स्वयं के व्यवहार का मार्गदर्शन करने में मदद मिलती है। भावनाओं के बारे में बात करने से व्यक्ति को संवेग को समझने में काफी मदद मिल जाती है।