Correct Answer:
Option A - ‘‘बीती विभावरी जाग री।
अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा घट ऊषा नागरी।’’
उपर्युक्त काव्य पंक्तियों में `रूपक' अलंकार है, क्योंकि यहाँ ‘अम्बर का पनघट में’ ‘तारा का घट में’ एवं ‘ऊषा का नागरी (सुंदर स्त्री) में’ उपमेय में उपमान का निषेधरहित आरोप है।
• रूपक अलंकार- जहाँ उपमेय को उपमान के रूप में दिखाया जाय, वहाँ रूपक अलंकार होता है। रूपक अलंकार के 3 भेद होते हैं- (1) निरंग रूपक, (2) सांग रूपक, (3) परंपरित रूपक
A. ‘‘बीती विभावरी जाग री।
अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा घट ऊषा नागरी।’’
उपर्युक्त काव्य पंक्तियों में `रूपक' अलंकार है, क्योंकि यहाँ ‘अम्बर का पनघट में’ ‘तारा का घट में’ एवं ‘ऊषा का नागरी (सुंदर स्त्री) में’ उपमेय में उपमान का निषेधरहित आरोप है।
• रूपक अलंकार- जहाँ उपमेय को उपमान के रूप में दिखाया जाय, वहाँ रूपक अलंकार होता है। रूपक अलंकार के 3 भेद होते हैं- (1) निरंग रूपक, (2) सांग रूपक, (3) परंपरित रूपक