Correct Answer:
Option C - ‘ब्रह्म + ऋर्षि’ = ‘ब्रह्मर्षि’ यहाँ पर ब्रह्म के मकारोत्तरवर्ती अ के पश्चात् ऋ (अच्) है। अत: ‘आद्गुण: से गुण की प्राप्ति होकर ‘उरण् रपर:’ की सहायता से उस गुण के रपर होने पर ‘अ’ बनता है। अब ‘ब्रह्म अर् षि’ में र् का ‘जलतुम्बिका-न्याय’ से उर्ध्वगमन होकर ‘ब्रह्मर्षि’ रूप सिद्ध हुआ है।
(स्रोत-लघुसिद्धान्तकौमुदी)
C. ‘ब्रह्म + ऋर्षि’ = ‘ब्रह्मर्षि’ यहाँ पर ब्रह्म के मकारोत्तरवर्ती अ के पश्चात् ऋ (अच्) है। अत: ‘आद्गुण: से गुण की प्राप्ति होकर ‘उरण् रपर:’ की सहायता से उस गुण के रपर होने पर ‘अ’ बनता है। अब ‘ब्रह्म अर् षि’ में र् का ‘जलतुम्बिका-न्याय’ से उर्ध्वगमन होकर ‘ब्रह्मर्षि’ रूप सिद्ध हुआ है।
(स्रोत-लघुसिद्धान्तकौमुदी)