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Q: ब्रह्मणा आत्माधीनं एकान्तगुणं योऽस्ति अपण्डितानाम्
  • A. मौनावलम्बनम्
  • B. वाचालगुणम्
  • C. परिभ्रमणम्
  • D. दुव्र्यसनम्
Correct Answer: Option A - ब्रह्मणा आत्माधीनं एकान्तगुणं योऽस्ति अपण्डितानाम् मौनावलम्बनम्। ब्रह्मा के द्वारा (अपने अधीन) मूर्खों के लिए एक मात्र गुण मौनावलम्बन को ही आभूषण बनाया है। ‘विभूषणं मौनमपण्डितानाम्’ विद्वानों के समाज में मौन (चुप रहना) अपण्डितों (मूर्खों) का आभूषण है। विद्वत् समाज में मूर्ख यदि मौन है तो वह विद्वान् ही समझा जाता है लेकिन जैसे ही वह बोलता है वैसे ही उसका भेद खुल जाता है कि वह क्या है इसका वर्णन भर्तृहरि के नीतिशतक में किया गया है।
A. ब्रह्मणा आत्माधीनं एकान्तगुणं योऽस्ति अपण्डितानाम् मौनावलम्बनम्। ब्रह्मा के द्वारा (अपने अधीन) मूर्खों के लिए एक मात्र गुण मौनावलम्बन को ही आभूषण बनाया है। ‘विभूषणं मौनमपण्डितानाम्’ विद्वानों के समाज में मौन (चुप रहना) अपण्डितों (मूर्खों) का आभूषण है। विद्वत् समाज में मूर्ख यदि मौन है तो वह विद्वान् ही समझा जाता है लेकिन जैसे ही वह बोलता है वैसे ही उसका भेद खुल जाता है कि वह क्या है इसका वर्णन भर्तृहरि के नीतिशतक में किया गया है।

Explanations:

ब्रह्मणा आत्माधीनं एकान्तगुणं योऽस्ति अपण्डितानाम् मौनावलम्बनम्। ब्रह्मा के द्वारा (अपने अधीन) मूर्खों के लिए एक मात्र गुण मौनावलम्बन को ही आभूषण बनाया है। ‘विभूषणं मौनमपण्डितानाम्’ विद्वानों के समाज में मौन (चुप रहना) अपण्डितों (मूर्खों) का आभूषण है। विद्वत् समाज में मूर्ख यदि मौन है तो वह विद्वान् ही समझा जाता है लेकिन जैसे ही वह बोलता है वैसे ही उसका भेद खुल जाता है कि वह क्या है इसका वर्णन भर्तृहरि के नीतिशतक में किया गया है।