Correct Answer:
Option B - ब्रह्मजिज्ञासा के साधन चतुष्ट्य में से इहामुत्रार्थफल भोगानुराग का ग्रहण नहीं हुआ है। वेदान्तसार के अनुसार,साधनचतुष्टय है–
1- नित्यानित्यवस्तु विवेक -नित्य, अनित्य वस्तु विवेक का होना।
2- इहामुत्रार्थफलभोगविराग- इह लोक एवं परलोक विषयक भोगने के प्रति वैराग्यभाव।
3- शमादिषट्क सम्पत्ति- शम, दम, उपरति, तितिक्षा, समाधान और श्रद्धा इन छह प्रकार की सम्पत्ति से सम्पन्न होना।
4- मुमुक्षत्व - मोक्ष की प्रबल इच्छा का होना।
B. ब्रह्मजिज्ञासा के साधन चतुष्ट्य में से इहामुत्रार्थफल भोगानुराग का ग्रहण नहीं हुआ है। वेदान्तसार के अनुसार,साधनचतुष्टय है–
1- नित्यानित्यवस्तु विवेक -नित्य, अनित्य वस्तु विवेक का होना।
2- इहामुत्रार्थफलभोगविराग- इह लोक एवं परलोक विषयक भोगने के प्रति वैराग्यभाव।
3- शमादिषट्क सम्पत्ति- शम, दम, उपरति, तितिक्षा, समाधान और श्रद्धा इन छह प्रकार की सम्पत्ति से सम्पन्न होना।
4- मुमुक्षत्व - मोक्ष की प्रबल इच्छा का होना।